यूएन पीसकीपिंग मिशन : UN मिशन से बाहर होंगे पाकिस्तान-चीन; भारत का कड़ा रुख
यूएन पीसकीपिंग मिशन : पहलगाम हमले में पाकिस्तानी सेना की सीधी संलिप्तता और भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के आरोपों के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान से सभी रिश्ते खत्म करने का फैसला किया है। यही वजह है कि इस साल अक्टूबर में होने वाले यूएन ट्रूप कॉन्ट्रिब्यूटर चीफ कॉन्क्लेव (UN TCC Conclave) में पाकिस्तान को आमंत्रण नहीं भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार, चीन की पीएलए-आर्मी को भी इस खास आयोजन में नहीं बुलाया जाएगा।
पहली बार भारत करेगा यूएन कॉन्क्लेव का आयोजन :
भारतीय सेना पहली बार इस कॉन्क्लेव का आयोजन राजधानी दिल्ली में करेगी। इस सम्मेलन में उन देशों के सेना प्रमुख शामिल होंगे, जिनके सैनिक यूएन पीसकीपिंग मिशन में तैनात हैं। इस समय दुनियाभर में संयुक्त राष्ट्र के 11 मिशन चल रहे हैं, जिनमें करीब 120 देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान के सबसे ज्यादा सैनिक इन मिशनों में तैनात रहते हैं।
पाकिस्तान को क्यों नहीं मिला न्योता ?
भारतीय सेना ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को इस कॉन्फ्रेंस के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा। वजह है 22 अप्रैल को पहलगाम हमला, जिसे लश्कर ए तैयबा के फ्रंट टीआरएफ (The Resistance Front) ने अंजाम दिया। भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय जांच में यह साफ हो गया है कि यह हमला पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सरपरस्ती में हुआ था।
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस हमले के लिए लश्कर ए तैयबा को जिम्मेदार ठहराया है। यही नहीं, जम्मू-कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर चलाने की पाकिस्तान की साजिशों के कारण भारतीय सेना ने उससे पूरी तरह दूरी बनाने का मन बना लिया है।
चीन को भी न्योता नहीं :
सूत्रों के मुताबिक, चीन की पीएलए आर्मी को भी इस कॉन्फ्रेंस में नहीं बुलाया जाएगा। भले ही पूर्वी लद्दाख में LAC पर डिसएंगेजमेंट एग्रीमेंट हो चुका है, लेकिन पिछले सात-आठ साल से भारत-चीन के रिश्ते सामान्य नहीं हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी चीन और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक तालमेल देखने को मिला था, जिससे भारत ने फिलहाल पीएलए से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
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थार रेगिस्तान में होगा फायरिंग ड्रिल :
दिल्ली में होने वाले इस कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने वाले देशों के सेना प्रमुखों को राजस्थान के थार रेगिस्तान में एक इंटीग्रेटेड फायरिंग ड्रिल भी दिखाई जाएगी। इस ड्रिल में स्वदेशी टैंक, तोप और अन्य हथियारों की ताकत का प्रदर्शन होगा। इसका उद्देश्य भारतीय सेना की आधुनिक क्षमताओं को दुनिया के सामने लाना है।
यूएन मिशन में भारत की बड़ी भूमिका :
फिलहाल भारतीय सेना के करीब 5,000 सैनिक संयुक्त राष्ट्र के 11 में से 9 मिशनों में तैनात हैं। ये मिशन सूडान, कांगो, गोलान हाइट्स जैसे संघर्षग्रस्त इलाकों में चल रहे हैं। भारत का यह कदम साफ संदेश देता है कि अब आतंक को संरक्षण देने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कोई जगह नहीं मिलेगी। पाकिस्तान और चीन को कॉन्फ्रेंस से बाहर रखना इसी रणनीति का हिस्सा है।
Editorial

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