उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली ख़बर सामने आई है। जिले के धराली गांव के पास दिन दहाडे बादल फटने की बड़ी घटना हुई, जिसमें भारी तबाही मच गई। पहाड़ियों से आया मलबा गांव में इस कदर फैल गया कि तकरीबन पुरा गांव ही इसकी चपेट में आकर पूरी तरह तबाह हो गया। उत्तरकाशी में फटे बादल ने इस तरह प्रलय मचाया की कईयों को संभलने का मौका भी नही दिया।



बादल फटने से गांव में मची तबाही

धराली गांव, जोकि गंगोत्री घाटी के पास स्थित है, एक शांत और सुंदर पहाडी इलाका है। मंगलवार को वहां कुछ ही सेकंड में ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। उत्तरकाशी में फटा बादल और उसकी वजह से आए तेज जलप्रवाह और मलबे ने धराली को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। कई ग्रामवासियों को जलसमाधी दे दी। तो कईयों को अपने साथ बहाकर दुर ले गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह घटना इतनी तेज़ी से हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग तो घर से बाहर भी निकल नही पाए।



मौतें और लापता लोगों की संख्या बढ़ने का अंदेशा

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उत्तरकाशी में बादल फटने की इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 50 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका और टूटे हुए संपर्क मार्ग राहत कार्य में बाधा बन रहे हैं।




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सोशल मीडिया पर वायरल हुए भयावह वीडियो

इस दर्दनाक घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे उत्तरकाशी में फटा बादल और उसके बाद आए प्रलय ने बड़े-बड़े पक्के मकानों को भी पलभर में जमींदोज कर दिया। एक वीडियो में साफ़ दिखता है कि कैसे पहाडो से आया पानी और मलबे का सैलाब मकानों को ताश पत्तो की तरह तबाह करते हुए निकल गया।



उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।



मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रहे पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में मानसून के दौरान बादल फटना अब आम होता जा रहा है, इसपर उपायों के चलते प्रशासन ने ही कुछ � ोस कदम उ� ाना जरुरी है। क्यो की अगर पहले ही जल के मार्ग से हटकर मकान बनाए जाए। तो उससे इन प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सकता है।




उत्तरकाशी में फटा बादल सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है ? हमारे पर्यावरण और आपदा प्रबंधन प्रणाली के लिए। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं आम होती जा रही हैं, और हर साल कई जानें सिर्फ इस कारण जाती हैं कि समय पर कार्रवाई नहीं होती या तैयारी अधूरी रहती है। अब समय आ गया है कि सरकार, प्रशासन और जनता मिलकर इस खतरे को गंभीरता से लें और भविष्य के लिए मजबूत रणनीति बनाएं।

Editorial

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