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राज ठाकरे केस में SC सख्त; याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
By EditorialPublished on
राज ठाकरे केस : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि राज ठाकरे के कथित नफरत फैलाने वाले बयानों पर महाराष्ट्र पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए और चुनाव आयोग से MNS की मान्यता रद्द करने को कहा जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से पूछा, “क्या हाई कोर्ट छुट्टी पर है?”
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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और उनकी पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा,
"क्या हाई कोर्ट छुट्टी पर है?"
इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ले ली और अब मामला हाई कोर्ट में दाखिल करने का फैसला किया।
किसने दाखिल की थी याचिका ?
यह याचिका उत्तर भारतीय विकास सेना के अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने वकील श्रीराम परक्कट के जरिए दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के खिलाफ नफरत फैलाने और हिंसा को बढ़ावा देने वाले बयान दिए।
सुनील शुक्ला ने कहा कि वे मुंबई में रहते हैं और उत्तर भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस वजह से उनकी पार्टी के दफ्तर पर भी पिछले साल MNS कार्यकर्ताओं ने हमला किया था।
क्या थीं याचिकाकर्ता की मांगें ?
याचिका में तीन मुख्य मांगें रखी गई थीं:
- महाराष्ट्र पुलिस को आदेश दिया जाए कि वे राज ठाकरे के भड़काऊ बयानों के लिए FIR दर्ज करें।
- चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि MNS की मान्यता रद्द की जाए।
- याचिकाकर्ता और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
क्या कहा याचिकाकर्ता ने ?
सुनील शुक्ला ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, DGP और मुंबई पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चुनाव आयोग को भी ज्ञापन दिया, पर वहां से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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याचिका में कहा गया कि गुड़ी पड़वा के मौके पर राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों पर हमले शुरू हो गए। डी मार्ट के कर्मचारी, एक बैंक कर्मी और वॉचमैन समेत कई लोग हिंसा का शिकार हुए।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती :
सुनवाई के दौरान CJI ने सख्त लहजे में कहा, "आप सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए हैं? पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? क्या हाई कोर्ट छुट्टी पर है?" इसके बाद याचिकाकर्ता ने संकेत समझते हुए याचिका वापस ले ली और हाई कोर्ट का रुख करने की बात कही।

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