“हमारे पड़ोसी मजबूत हैं” फारूक अब्दुल्ला का बयान गरमाया सियासत
अनुच्छेद 370 हटने के 5 अगस्त को नौ साल पूरे होने वाले हैं, और इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर के हालात पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बेहतर नहीं होंगे, तब तक कश्मीर से आतंकवाद खत्म नहीं होगा।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम इस भ्रम में जी रहे हैं कि अचानक शांति आ जाएगी, जबकि हकीकत यह है कि हमारे पड़ोसी ताकतवर हैं, चाहे वह चीन हो या पाकिस्तान।
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“अचानक ट्रंप पाकिस्तान के साथ दोस्ताना हो गए” :
न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों को भी कश्मीर मुद्दे से जोड़ा। उन्होंने कहा: "अब अचानक ट्रंप पाकिस्तान के साथ ज्यादा दोस्ताना हो गए हैं। अमेरिका हमें कहता है कि हम रूसी तेल न लें, लेकिन पाकिस्तान से कहता है कि वह उन्हें कच्चा तेल भेजेगा और वहां रिफाइनिंग होगी, जिससे पेट्रोल-डीज़ल के दाम घटेंगे। इस तरह वे पाकिस्तान को मजबूत बना रहे हैं। चीन तो पहले से ही उनके पीछे है।"
“हमारे पड़ोसी हमारे दोस्त नहीं हैं” :
फारूक अब्दुल्ला ने पड़ोसी देशों के साथ भारत के रिश्तों पर सवाल उठाते हुए कहा: "हमारे पड़ोसी हमारे दोस्त नहीं हैं। बताइए, कौन-सा पड़ोसी देश हमारा मित्र है? हमने यह दिखाने की कोशिश की है कि हम उनसे अधिक ताकतवर हैं, जबकि हमें यह सोचना चाहिए कि हम सब साथ मिलकर चलें। इंदिरा गांधी ने सार्क की स्थापना इसी उद्देश्य से की थी कि आसपास के देश मिलकर क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान करें, आर्थिक विकास करें और शांति बनाए रखें।"
“युद्ध नहीं, बातचीत है हल” :
फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर में शांति को लेकर कहा: "मैं आज शांति आते नहीं देखता। मुझे लगता है हम एक भ्रम में जी रहे हैं कि शांति अचानक आ जाएगी। हमारे पड़ोसी ताकतवर हैं, चाहे वह चीन हो या पाकिस्तान। हमें कोई हल खोजना ही होगा। युद्ध कोई हल नहीं है। अंत में समाधान बातचीत से ही निकलता है।"
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जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलेगा ?
राज्य का दर्जा बहाल होने के सवाल पर फारूक अब्दुल्ला ने भरोसा जताया। उन्होंने कहा: "हां, मुझे पूरा यकीन है कि राज्य का दर्जा बहाल करना ही होगा। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।" फारूक अब्दुल्ला का यह बयान अनुच्छेद 370 हटने के नौ साल पूरे होने से ठीक एक दिन पहले आया है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
Editorial

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