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विनय धर्म का मूल
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मेवाड़ भवन गोरेगांव में साध्वी विजय लता मसा, प्रज्ञाश्री मसा, पुण्याश्री मसा की प्रवचन श्रृंखला में साध्वी विजय लता मसा ने कहा कि मानव जीवन में विनय धर्म नहीं अपनाया तो बहुत कुछ खो दोगे।

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मुंबई। मेवाड़ भवन गोरेगांव में साध्वी विजय लता मसा, प्रज्ञाश्री मसा, पुण्याश्री मसा की प्रवचन श्रृंखला में साध्वी विजय लता मसा ने कहा कि मानव जीवन में विनय धर्म नहीं अपनाया तो बहुत कुछ खो दोगे। उन्होंने कहा कि चार गति में मानव भव बड़ा दुर्लभ है। इस भव में कषायों का पोषण किया तो आगे 84 लाख जीव योनी की घाटी है। इसलिए विनय धर्म को अपनाओ।
उन्होंने कहा कि साधु का धर्म अणगार धर्म है जिसमें कोई आगार नहीं है, जबकि श्रावक धर्म आगार धर्म है जिसमें व्रत में छूट रख सकता है। जहां सयोग होगा वहां वियोग होगा। सयोग की इच्छा मत रखो। दूध में शक्कर मिलाओगे तो स्वाद शक्कर का आएगा, दूध का नहीं। थोड़े से स्वाद के लिए दूध के मूल गुण को मत भूलो। इसी तरह थोड़े से सुख के चक्कर में अनंत दुखों का सामना करना पड़ता है।
साध्वी प्रज्ञाश्री मसा ने कहा कि जीवन में सरलता और संतोष धारण करो। साध्वी पुण्यश्री मसा ने कहा कि किसी के साथ वैर संबंध मत रखो, यह संबंध भव-भव तक दुख देंगे।
धर्मसभा में भायंदर उपसंघ मंत्री संपत पामेचा, कमला वडाला, मेवाड़ संघ अध्यक्ष भेरुलाल लोढा, कोषाध्यक्ष फूलचंद नाहर ने विचार व्यक्त किए। संचालन मेवाड़ संघ महामंत्री प्रकाश नाहर ने किया। यह जानकारी ज्ञान प्रकाश समिति के पूर्व संयोजक विनोद चपलोत ने दी।

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