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मुंबई। निर्धारित दवाओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए मुंबई पुलिस ने सभी मेडिकल स्टोर्स को अपने परिसर में एक महीने के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है।
हालांकि, मेडिकल स्टोर्स और केमिस्ट दुकानों के मालिक इस कदम से नाराज़ हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे उपायों से कोई मदद नहीं मिलेगी।
निर्धारित दवाओं से तात्पर्य उन दवाओं से है जिन्हें ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के तहत नियंत्रित किया गया है, जैसे कि उनका निर्माण, भंडारण, वितरण और प्रिस्क्रिप्शन कैसे किया जाए। उदाहरण के तौर पर, शेड्यूल एच में वे दवाएं आती हैं जिन्हें डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं बेचा जा सकता, और शेड्यूल एक्स में वे दवाएं आती हैं जो अत्यधिक लत लगाने वाली होती हैं।
यह निर्देश भारतीय सिविल सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 152 के तहत, पुलिस उपायुक्त (एंटी-नारकोटिक्स सेल) नवनाथ धवले द्वारा खुफिया जानकारी के आधार पर जारी किया गया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और नई दिल्ली स्थित बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी हाल ही में बिना वैध पर्चे के निर्धारित दवाओं और इन्हेलेंट्स की बिक्री को लेकर चिंता जताई थी।
एंटी-नारकोटिक्स सेल और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को मुंबई के कई मेडिकल स्टोर्स में आदत डालने वाली दवाएं बिना उचित रिकॉर्ड रखे बेचे जाने की जानकारी मिली थी।

आदेश के अनुसार, मुंबई और उपनगरीय जिलों की हर मेडिकल दुकान को अपने प्रवेश द्वार, निकास और बिक्री काउंटर पर इस तरह सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे कि ग्राहकों के चेहरे और लेन-देन रिकॉर्ड हो सकें।

कैमरों की न्यूनतम रेजोल्यूशन 2 मेगापिक्सल होनी चाहिए और फुटेज कम से कम एक महीने तक संग्रहीत रखी जानी चाहिए। जिला औषधि नियंत्रण प्राधिकरण और बाल कल्याण पुलिस अधिकारी सीसीटीवी फुटेज की जांच कर सकते हैं।

मेडिकल दुकान मालिकों को आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह पहल प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के दुरुपयोग और उन्हें नशीली दवाओं के व्यापार में मोड़ने पर लगाम लगाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

ऑल फूड एंड लाइसेंस होल्डर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडे के मुताबिक, "पहली बात, अगर एफडीए अधिकारी साथ नहीं हैं, तो पुलिस को मेडिकल स्टोर्स की जांच करने का अधिकार नहीं है। दूसरी बात, ये सीसीटीवी कैमरे किसी काम के नहीं क्योंकि पर्चे और दवा की स्ट्रिप्स छोटे अक्षरों में लिखी होती हैं। कैमरा इसमें क्या मदद करेगा?"

मुंबई रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रसाद दानवे ने कहा, "कैमरा यह कैसे देखेगा कि कौन सी दवा बेची गई? और उन ऑनलाइन साइट्स का क्या जो 14 साल की लड़की को गर्भपात की गोली बेचती हैं? उन पर कोई निगरानी है क्या?"
Editorial

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