Hariyali Teej 2025
हरतालिका तीज 2025 का व्रत मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। हरतालिका तीज पर महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और अपने वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र, सौभाग्य और खुशहाली की कामना करती हैं। इस साल हरतालिका तीज का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:27 बजे से शुरू होगा। इसके बाद दोपहर में अभिजीत मुहूर्त, प्रदोष काल, संध्याकाल और निशिता काल में भी पूजा के लिए शुभ समय रहेगा।
पूजा सामग्री और भोग :
हरतालिका तीज की पूजा में विशेष रूप से पांच प्रकार के फल, मिठाई, गेंदा और गुलाब के फूल, पान के पत्ते, आम के पत्ते, बेलपत्र, दूर्वा, धतूरा और भांग पत्र का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा पारंपरिक भोग जैसे गुझिया, पिडुकिया और मालपुआ का भी आयोजन किया जाता है।
पूजा मंत्र :
हरतालिका तीज 2025 की पूजा में इन मंत्रों का पाठ करना शुभ माना गया है:
  • "ओम पार्वत्यै नमः ओम उमाये नमः"
  • "या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:"
  • "सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।"
व्रत नियम और महत्व :
हरतालिका तीज का व्रत निर्जला यानी बिना अन्न-जल ग्रहण किए रखा जाता है। व्रत के दौरान महिलाएं सुहाग से जुड़े श्रृंगार जैसे मेहंदी, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर लगाना न भूलें। व्रत समाप्त करने का सही समय अगले दिन सूर्योदय के बाद होता है। इस दौरान व्रती महिलाओं को नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
शुभ मुहूर्त और राहुकाल :
हरतालिका तीज 2025 पर पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, प्रदोष काल, संध्याकाल और निशिता काल का विशेष महत्व है। राहुकाल 03:36 से 05:13 बजे तक है, इस समय पूजा नहीं करनी चाहिए। इस साल कई शुभ योग बन रहे हैं जैसे गुरु और चंद्रमा के गजकेसरी योग, रवि योग, साध्य योग और शुभ योग।
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हरतालिका तीज की कथा :
कथा के अनुसार माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को पाया। इस कारण से यह व्रत विवाहित और कुंवारी महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्रत के प्रभाव से महिलाओं को देवी गौरी और भगवान शिव की कृपा से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
Hariyali Teej 2025 का यह व्रत धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। महिलाएं इस दिन पूजा, भजन-कीर्तन और दान के माध्यम से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं।
Editorial

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