forgiveness
मुंबई। किसी को न तू दुश्मन मान, न किसी से बैर पाल। क्षमा ही आत्मा का सच्चा आभूषण है।पर्वाधिराज पर्युषण के छठे दिन पनवेल जैन स्थानक में धर्मसभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने यह बात कही। युवाचार्य ने कहां संवत्सरी आत्मा की आईटीआर भरने का दिन है। इस दिन राग-द्वेष की गांठों को खोलकर आत्मा को हल्का करना ही सच्चा प्रायश्चित्त है।
उन्होंने कहा जीवन में किसी को दुश्मन मानना ही सबसे बड़ी गलती है। गांठ चाहे धागे की हो या मन की दोनों भारी कर देती हैं। धागे की गांठ कपड़े को बिगाड़ती है, और मन की गांठ आत्मा को। इसलिए संवत्सरी पर पुरानी गांठें खोलो और नई गांठें मत बांधो।
उन्होंने बच्चों का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चा पलभर में रूठता है और पलभर में मान भी जाता है, क्योंकि उसका हृदय निर्मल होता है। बच्चे के हृदय में न बैर है, न द्वेष। धर्म यही सिखाता है कि हम भी बच्चों की तरह सरल और कोमल बनें।
युवाचार्य ने कहा कि सच्चा धर्म वही है, जो हमें मन की गांठों से मुक्त कर दे। उन्होंने कहा कि कोई कितना भी अपमान कर दे, किंतु क्षमा करने वाला ही आत्मा के महोत्सव का अधिकारी बनता है। क्षमा आत्मा को पवित्र करती है और संवत्सरी क्षमा का ही महापर्व है। इसलिए किसी को दुश्मन मत मानो, न किसी से बैर रखो।
सभा से पूर्व धवल ऋषि एवं हितेंद्र ऋषि ने शास्त्र वाचन एवं विवेचन किया। मावल सांसद रंग अप्पा बारने मौजूद रहे। चातुर्मास समिति अध्यक्ष राजेश बांठिया, राजेंद्र बांठिया, शैलेन्द्र खेरोदिया, शीतल बांठिया एवं विजय श्रीमाल ने स्वागत किया। संचालन अशोक बोहरा ने किया।
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