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गलत चुनावी डेटा विवाद; सुप्रीम कोर्ट से संजय कुमार को राहत
By EditorialPublished on
CSDS के डायरेक्टर संजय कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से जुड़ा गलत आंकड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करने और बाद में उसे डिलीट कर माफी मांगने के बावजूद उनके खिलाफ दो केस दर्ज हुए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

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लोकनीति-CSDS के डायरेक्टर और मशहूर चुनाव विश्लेषक संजय कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट से जुड़े गलत आंकड़े ट्वीट करने के मामले में दर्ज मुकदमों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। Sanjay Kumar Supreme Court मामले में अंतरिम आदेश के तहत महाराष्ट्र पुलिस अब इन एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगी।
महाराष्ट्र में दर्ज हुई थीं दो एफआईआर :
संजय कुमार के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। पहली एफआईआर नागपुर के रामटेक थाने में दर्ज हुई, जिसमें गलत सूचना फैलाने और चुनाव नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। एफआईआर में उनके खिलाफ बीएनएस की धाराएं 175, 353(1)(बी), 212 और 340(1)(2) शामिल की गई हैं। दूसरी एफआईआर नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई, जहां उन पर वोटों में धांधली का झूठा आरोप लगाने का केस दर्ज हुआ। अब Sanjay Kumar Supreme Court केस में इन दोनों एफआईआर पर रोक लगा दी गई है।
कौन सा ट्वीट बना विवाद का कारण ?
संजय कुमार ने 2024 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची का विश्लेषण करते हुए एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि रामटेक विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में 38.45% की कमी दर्ज हुई, जबकि देवलाली क्षेत्र में 36.82% मतदाताओं की संख्या घटी। इस ट्वीट के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। चुनाव आयोग और शिकायतकर्ताओं ने इसे गलत और भ्रामक बताया।
हालांकि बाद में संजय कुमार ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और सार्वजनिक माफी भी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़े उनकी टीम द्वारा गलत पढ़े गए थे और उनका किसी भी तरह से गलत सूचना फैलाने का इरादा नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम राहत :
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए संजय कुमार को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी किया है और फिलहाल दोनों एफआईआर पर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। इस तरह Sanjay Kumar Supreme Court केस में उन्हें बड़ी राहत मिली है।
संजय कुमार की दलील :
अपनी याचिका में संजय कुमार ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से चुनाव विश्लेषण से जुड़े हुए हैं और अब तक उनकी साख बेदाग रही है। इस बार उनकी टीम से आंकड़ों को लेकर गलती हुई, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार किया और माफी भी मांग ली। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करना उचित नहीं है।
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क्यों अहम है यह फैसला ?
यह फैसला चुनाव विश्लेषकों और डेटा रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों के लिए अहम मिसाल साबित हो सकता है। गलती स्वीकार करने और माफी मांगने के बावजूद एफआईआर दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशेवर विश्लेषण की सीमाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। Sanjay Kumar Supreme Court केस आने वाले समय में इस तरह के मामलों में एक मिसाल बन सकता है।

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