विज्ञान का नया रूप : पटना तारामंडल में लगेगा विज्ञान का मेला
पटना, 23 अगस्त। अब विज्ञान को समझना केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे रोमांचक और आधुनिक तकनीकों के जरिए प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकेगा। पटना स्थित इंदिरा गांधी तारामंडल (प्लैनेटेरियम) परिसर में विज्ञान प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए जल्द ही सोविनियर शॉप और वीआर थियेटर की शुरुआत होने जा रही है। इन दोनों सुविधाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को विज्ञान को और गहराई से, व्यवहारिक और रोमांचक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।


पटना, 23 अगस्त। अब विज्ञान को समझना केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे रोमांचक और आधुनिक तकनीकों के जरिए प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकेगा। पटना स्थित इंदिरा गांधी तारामंडल (प्लैनेटेरियम) परिसर में विज्ञान प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए जल्द ही सोविनियर शॉप और वीआर थियेटर की शुरुआत होने जा रही है। इन दोनों सुविधाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को विज्ञान को और गहराई से, व्यवहारिक और रोमांचक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।
विज्ञान से जुड़ी वस्तुएं होंगी उपलब्ध
तारामंडल में बनने वाली सोविनियर शॉप का टेंडर फाइनल हो चुका है और निर्माण कार्य प्रगति पर है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस दुकान में विज्ञान से जुड़े उपकरण, विभिन्न विषयों की किताबें, स्पेस सूट, ड्रोन, साइंटिफिक मॉडल और बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक खिलौने उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के बीच विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाना है। यहां का माहौल एक तरह के विज्ञान मेले जैसा होगा, जहां हर तरफ विज्ञान से जुड़ी वस्तुएं और मॉडल देखने को मिलेंगे।
25 सीटों वाला वीआर थियेटर
वहीं दूसरी ओर, परिसर में 25 सीटों वाला वीआर (वर्चुअल रियलिटी) थियेटर भी तैयार किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इसका उद्घाटन इसी माह के अंत तक होने की संभावना है। इस थियेटर में दर्शकों को 3डी और 4डी का अद्भुत अनुभव मिलेगा।
खास सिम्युलेटर कुर्सियों और वीआर हेडसेट की मदद से दर्शक रोलर कोस्टर राइड, पानी के भीतर जाने का अनुभव, कंपन और अन्य रोमांचक गतिविधियों को वास्तविक अहसास की तरह महसूस कर सकेंगे।
हर दिन 2000 लोग आते हैं तारामंडल
पटना तारामंडल में वर्तमान में एक दिन में आठ शो चलाए जाते हैं और प्रतिदिन लगभग 2000 लोग यहां पहुंचते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी के लिए यह जगह विज्ञान को करीब से समझने का अवसर देती है।
‘बिहार से’ रेस्टोरेंट भी बना आकर्षण
इसके साथ ही तारामंडल परिसर में हाल ही में ‘बिहार से’ नामक रेस्टोरेंट की भी शुरुआत की गई है। यहां का वातावरण पूरी तरह से बिहार थीम पर आधारित है। दीवारों पर मिट्टी जैसे रंग के साथ मिथिला पेंटिंग सजाई गई है।
रेस्टोरेंट में भोजन पत्तल में परोसा जाता है और पानी कुल्हड़ में दिया जाता है। यहां बिहार के हर जिले के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन जैसे मालपुआ, प्याजी, बचका, मुर्गा झोर, तली हुई मछली, लिट्टी-चोखा, खुरमा आदि उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि रेस्टोरेंट का मेनू भी पूरी तरह देसी अंदाज में लिखा गया है ताकि हर व्यक्ति आसानी से समझ सके।
विज्ञान और संस्कृति का संगम
इस तरह पटना का तारामंडल अब केवल खगोल विज्ञान समझाने का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि यहां आने वाले आगंतुकों को विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यह पहल न केवल विद्यार्थियों को प्रेरित करेगी बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी पटना के आकर्षण को बढ़ाएगी।

