मेवाड भवन
मुंबई। मेवाड़ भवन, गोरेगांव में गुरूवार को साध्वी प्रज्ञाश्री मसा ने कहा कि जीवों की रक्षा के लिए यदि आवश्यक हो तो असत्य भाषा भी स्वीकार है। भाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे न स्वयं को और न दूसरों को पीड़ा पहुँचे। साध्वी पुण्या मसा ने कहा कि हमें भाषा का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि हमारी पहचान हमारी भाषा से ही होती है। जितनी सभ्य भाषा होगी, उतना ही जीवन संस्कारित होगा।साध्वी विजयलता मसा ने कहा पर्युषण पर्व का आज दूसरा दिन है। इन दिनों में जप, तप और खप कर लो। जाप से पुण्य कमाओ, तप से कर्म खपा दो। हमने पहले भी कई पर्युषण पर्व मनाए, परंतु अभी तक आश्रव को दूर नहीं किया। अब आश्रव को दूर भगाकर स्वरूप में आओ। छोटे-छोटे नियम लेकर बड़े-बड़े कर्म बंधनों से मुक्त हो जाओ। भोजन से पहले ‘णमो अरिहंताणं’ बोलो और भोजन के बाद ‘णमो सिद्धाणं’। इन दोनों के बीच की प्रक्रिया से आप पचखान में आ जाओगे। इस पर्युषण पर्व में पर-स्थान से स्व-स्थान में प्रवेश करो। आज पूरी दुनिया का व्यवहार भाषा से चलता है। इसलिए हमें मीठी और हितकारी भाषा का प्रयोग करके अपनी भावनाओं को पवित्र बनाना चाहिए। महावीर कल्याणक दिवस समीप है। इस अवसर पर अधिक से अधिक तप करें। पर्युषण पर्व की बेला में सांसारिक गतिविधियों से थोड़ा दूर रहकर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ें और अपनी आत्मा का कल्याण करें। कलंबोली, मोठा, खारघर और बेलापुर उपसंघ की सेवा रही। मेवाड संघ अध्यक्ष भेरूलाल लोढ़ा महामंत्री प्रकाश नाहर कोषाध्यक्ष फूलचंद नाहर के नेतृत्व में सम्मान किया गया। मेवाड़ संघ, महिला मंडल, नवयुवक मंडल, कन्या मंडल एवं मेवाड़ संघ की सभी सह-संस्थाओं के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। यह जानकारी विनोद चपलोत ने दी।
Editorial

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