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उपार्जित पुण्य राशि का सदुपयोग करें
By EditorialPublished on
वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मेवाड़ भांडुप साधना सदन में महासती मुक्ति प्रभा मसा ठाणा-3 के सानिध्य में महापर्व के दूसरे दिन अंतगड सूत्र का वाचन हुआ।
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इस अवसर पर महासती ने कहा कि मनुष्य को पूर्व जन्मों के पुण्य से ही मनुष्य जन्म, उत्तम कुल, आर्य क्षेत्र और श्रेष्ठ संस्कार प्राप्त होते हैं। किंतु यदि पुण्य से मिली यह स्थिति केवल भोग-विलास, आमोद-प्रमोद और कषाय-वृद्धि में ही नष्ट कर दी जाए, तो जीवन का उद्देश्य विफल हो जाता है।
महासती वृंदाश्री ने कहा कि महापर्व के दिनों में आत्मसाधना द्वारा आत्मकल्याण ही हमारा प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।
अध्यक्ष बलवंत बोलीया, कोषाध्यक्ष सुरेश चपलोत सहित नवयुवक मंडल, महिला मंडल, कन्या मंडल व वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। संचालन संघ मंत्री सुरेश बंबोरी ने किया। यह जानकारी संघ संरक्षक ओंकारलाल बंबोरी ने दी।

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