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मित्रता ही करती है मुक्ति की राह को प्रशस्त
By EditorialPublished on
मित्रता ही मुक्ति की राह को प्रशस्त करती है। पर्वाधिराज पर्युषण के दूसरे दिन पनवेल में श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन का हर क्षेत्र चाहे परिवार हो, व्यापार हो या समाज मित्रता की नींव पर टिका है। यदि डॉक्टर मरीज से मित्रता का भाव रखे तो ऑपरेशन का दर्द भी कम हो जाता है। इसी प्रकार व्यापार में मार्केटिंग और सेल्समैनशिप की सफलता भी मित्रता पर आधारित होती है।

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मुंबई। मित्रता ही मुक्ति की राह को प्रशस्त करती है। पर्वाधिराज पर्युषण के दूसरे दिन पनवेल में श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जीवन का हर क्षेत्र चाहे परिवार हो, व्यापार हो या समाज मित्रता की नींव पर टिका है। यदि डॉक्टर मरीज से मित्रता का भाव रखे तो ऑपरेशन का दर्द भी कम हो जाता है। इसी प्रकार व्यापार में मार्केटिंग और सेल्समैनशिप की सफलता भी मित्रता पर आधारित होती है।
सच्चे मित्र का स्वरूप बताते हुए युवाचार्य कहा कि मित्र वही है जो हमें पाप से दूर कर हित से जोड़े। मित्र आईने की तरह होता है, जो हमारी कमियाँ दिखाकर सुधार का अवसर देता है और अच्छाइयों को प्रकट करता है। वास्तविक मित्र वही है जो रोक-टोक कर हमें गलत मार्ग से बचाए।
अंत में उन्होंने कहा कि जीवन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण मित्रता माता-पिता और गुरुजनों से होनी चाहिए, क्योंकि वही हमें जीवन का आधार और मुक्ति की सच्ची दिशा प्रदान करते हैं। चातुर्मास समिति अध्यक्ष राजेश बांठिया, मनोज बांठिया, बिपिन मुणोथ, मदनलाल चपलोत, ललित चंडालिया, अशोक बोहरा, रणजीत काकरेचा, प्रकाश कर्नावट, शीतल बांठिया, महावीर सोलंकी, संतोष मुणोथ, जयंती परमार, गौरव बांठिया, रिखब बनवट आदि के साथ प्रेरणा महिला, आनंद धार्मिक मंडल ओर मेवाड़ महिला मंडल की उपस्थिति रही।

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