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खेत से भाग्य तक” पहल को मिला सम्मान, बिहार कृषि विभाग को सीआईपीएस नवाचार पुरस्कार
By EditorialPublished on
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने विभाग को सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार केंद्र (CIPS) नवाचार पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया। यह सम्मान विभाग को दो श्रेणियों में प्राप्त हुआ—“ग्रामीण विकास” के तहत ‘खेत से भाग्य तक – मखाना के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना’ पहल और “आईटी” श्रेणी के अंतर्गत कृषि योजनाओं में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लिए विकसित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म।

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श्रीनगर, 22 अगस्त 2025 – बिहार सरकार के कृषि विभाग ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने विभाग को सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार केंद्र (CIPS) नवाचार पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया। यह सम्मान विभाग को दो श्रेणियों में प्राप्त हुआ—“ग्रामीण विकास” के तहत ‘खेत से भाग्य तक – मखाना के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाना’ पहल और “आईटी” श्रेणी के अंतर्गत कृषि योजनाओं में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लिए विकसित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म।
यह सम्मान समारोह श्रीनगर के पंडित भजन सोपोरी सभागार में भव्य रूप से आयोजित हुआ, जिसमें जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव श्री अटल डुल्लू सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बिहार कृषि विभाग की ओर से प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर निदेशक उद्यान श्री अभिषेक कुमार और संयुक्त निदेशक (शस्य) डॉ. राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।
उपराज्यपाल ने की सराहना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि मखाना उत्पादन ने बिहार को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने “खेत से भाग्य तक” पहल को ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग द्वारा तैयार किए गए डीबीटी प्लेटफॉर्म की भी सराहना की और कहा कि यह पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार का आदर्श मॉडल है, जिसने करोड़ों किसानों तक सीधा लाभ पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है।
उपमुख्यमंत्री का संदेश
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने इस उपलब्धि पर विभाग और राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा—
“यह सम्मान बिहार सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मखाना आधारित पहल ने ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है, जबकि डीबीटी प्लेटफॉर्म ने सब्सिडी हस्तांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया है। यह उपलब्धि बिहार को कृषि नवाचार का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।”
CIPS की भूमिका
हैदराबाद स्थित भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय में स्थापित सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार केंद्र (CIPS) का उद्देश्य शासन-प्रशासन में नवाचार को बढ़ावा देना है। यह केंद्र राज्यों को रचनात्मक विचारों को व्यवहारिक और स्थायी प्रथाओं में बदलने में मदद करता है।
मखाना बना ग्रामीण सशक्तिकरण का आधार
बिहार कृषि विभाग ने मखाना को वैश्विक स्तर पर सुपरफूड के रूप में पहचान दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए।
वैज्ञानिक पद्धति से खेती का विस्तार
प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना
बाजार और निर्यात संवर्धन पर फोकस
इन पहलों के चलते किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। “खेत से भाग्य तक” योजना ने ग्रामीण समुदायों को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि समावेशी विकास और सतत कृषि की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डिजिटल नवाचार से पारदर्शिता
कृषि विभाग ने डीबीटी के लिए एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसमें अब तक 2 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं।
2.28 करोड़ से अधिक ऑनलाइन आवेदन संसाधित
4300 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित
97% से अधिक सफलता दर
यह प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, स्वचालित और समय-समय पर ऑडिटेड है।
बिहार का बढ़ता कदम
यह सम्मान बिहार सरकार की दूरदृष्टि और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है। मखाना आधारित पहल और डिजिटल नवाचार ने बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यह सफलता न केवल राज्य के किसानों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाएगी, बल्कि बिहार को कृषि एवं आईटी नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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