महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई मोनोरेल हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने इस खराबी का कारण अत्यधिक भीड़ बताया है और कहा है कि यात्रियों की अधिक संख्या के कारण ट्रेन का वजन उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक था।


मोनोरेल हादसा
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई मोनोरेल हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने इस खराबी का कारण अत्यधिक भीड़ बताया है और कहा है कि यात्रियों की अधिक संख्या के कारण ट्रेन का वजन उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक था। मुम्बई मोनोरेल में फंसे 582 यात्रियों को रेस्क्यू कर लिया गया है। इनमें से 23 यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिनका 108 एम्बुलेंस के डॉक्टर ने मौके पर इलाज किया और उन्हें जाने दिया। 2 मरीजों को सायन हॉस्पिटल भेजा गया। बीएमसी के मुताबिक, 20 साल के किस्मत कुमार और 28 साल के विवेक सोनवणे का ओपीडी में इलाज हुआ। दोनों की हालत अब स्थिरहै।
कैसे हुआ मोनोरेल हादसा?
मंगलवार शाम मैसूर कॉलोनी के पास भक्ति पार्क और चेंबूर स्टेशनों के बीच एक मुंबई मोनोरेल ट्रेन में खराबी आ गई थी। इस वजह से सैकड़ों यात्री फंस गए। ट्रेन में निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण यह खराबी आई। इसके बाद अग्निशमन कर्मियों ने यात्रियों को बचाने के लिए स्नोर्कल वाहनों का इस्तेमाल किया, जबकि उन्हें पास के रेलवे स्टेशनों तक पहुंचाने के लिए बेस्ट बसों का इस्तेमाल किया गया। बचाव अभियान पूरा होने में साढ़े तीन घंटे से ज्यादा का समय लगा, जिसमें 582 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। यात्रियों ने इस घटना को भयावह बताया, कुछ लोगों को एअर कंडीशनिंग और बिजली की कमी के कारण घुटन और सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ा। बचाए गए एक यात्री सागर शिंदे ने कहा, “बाहर बारिश हो रही थी और अंधेरा तेज़ी से बढ़ रहा था। साथ ही, एअर-कंडीशनिंग बंद हो गई थी और हमारा दम घुट रहा था। सबसे बुरी बात यह थीर कि ट्रेन खतनाक तरीके से झुक गई थी और हम दुआ कर रहे थे कि हम जिंदा बच जाएं।”
Editorial

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