पटना में ‘गानों में अश्लीलता: समाधान’ विषय पर सिने संवाद का आयोजन


पटना, 21 अगस्त। बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (फिल्म निगम) की ओर से पटना स्थित बिहार ललित कला अकादमी में ‘गानों में अश्लीलता: समाधान’ विषय पर सिने संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर संगीत जगत से जुड़े दिग्गज कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भोजपुरी गीत-संगीत में बढ़ती अश्लीलता को गंभीर चुनौती बताते हुए इसके समाधान पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकगायक भरत शर्मा व्यास ने कहा कि आज भोजपुरी भाषा को लोग अश्लीलता की वजह से नीची नजर से देखते हैं, जबकि 30 साल पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने कहा, “भोजपुरी गीतों में बढ़ती अश्लीलता के लिए सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि श्रोताओं और मंच देने वालों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। अश्लील गीत गाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और सुनने वालों को भी ऐसे गीतों को अस्वीकार करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि 90 के दशक में भी अश्लील गीत आए थे, लेकिन दो-तीन साल में ही वो बाजार से गायब हो गए और आज उन गायकों की पहचान सिर्फ अश्लील गीत गाने वालों के तौर पर होती है।

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता नंद कुमार तिवारी ने कहा कि कलाकारों और गीतकारों को शपथ लेनी होगी कि वे न तो अश्लील गीत लिखेंगे और न ही गाएंगे।

फिल्म निगम की महाप्रबंधक श्रीमती रूबी (IAS) ने कहा कि बिहार के पास शास्त्रीय संगीत, लोकगीत और धुनों की समृद्ध परंपरा है, जिसे आगे बढ़ाना समय की जरूरत है। वहीं, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. अजय ने कहा कि अगर कोई अच्छा गाता है तो उसे श्रोता भी मिलेंगे, पैसा और मंच भी मिलेगा।

फिल्म निगम के परामर्शी (फिल्म) अरविंद रंजन दास ने कहा कि बिहार के मनोरंजन जगत पर अश्लील गीतों का कलंक लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “इस दाग से मुक्ति पाने और स्वस्थ लोक परंपरा को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। इसी दिशा में फिल्म निगम का यह संवाद एक प्रयास है, ताकि बिहार का संगीत और फिल्म जगत अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पा सके।”



भरत शर्मा व्यास: भोजपुरी सम्राट की पहचान

1 अगस्त 1957 को बक्सर जिले के नगपुरा गांव में जन्मे भरत शर्मा व्यास ने अपनी गायकी से भोजपुरी संगीत को नया मुकाम दिया। उन्होंने 14 साल की उम्र में रामायण के पद गाकर अपने करियर की शुरुआत की और 1989 में उनका पहला ऑडियो कैसेट जारी हुआ। “गोरिया चांद के ईजोरिया” जैसे कालजयी गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।

आज उनके प्रशंसक न केवल भारत बल्कि ओमान, मॉरीशस, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों में भी हैं। उन्हें भिखारी ठाकुर सम्मान, भोजपुरी रतन सम्मान, लोक गौरव सम्मान सहित दर्जनों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। वर्ष 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। व्यास लंबे समय से भोजपुरी गीतों में अश्लीलता और द्विअर्थी संवादों के खिलाफ मुखर रहे हैं।



बिहार फिल्म निगम की पहल

फिल्म निगम राज्य में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए आधारभूत ढांचा विकसित कर रहा है। इसमें फिल्म निर्माण पर अनुदान, शूटिंग की आसान अनुमति व्यवस्था, फिल्म छात्रों को छात्रवृत्ति, कार्यशालाओं का आयोजन, सिने संवाद, कॉफी विद फिल्म और फिल्म महोत्सव जैसे कई कार्यक्रम शामिल हैं।

Editorial

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