बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के शताब्दी समारोह का उद्घाटन


पटना, 21 अगस्त 2025।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र, पटना स्थित बापू सभागार में आयोजित बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना के शताब्दी समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बोर्ड के सौ वर्ष पूरे होने पर खुशी व्यक्त की और कहा कि यह अवसर न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। समारोह में मदरसा शिक्षा से जुड़े 15 हज़ार से अधिक लोग उपस्थित रहे।


मदरसों के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2005 से पहले मुस्लिम समुदाय के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। लेकिन एनडीए सरकार बनने के बाद इस समुदाय के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से मदरसों का निबंधन और सरकारी मान्यता शुरू की गई तथा मदरसा शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जाने लगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मदरसों की स्थिति बेहद खराब थी और शिक्षकों को बहुत कम वेतन मिलता था। सरकार बनने के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए और आज मदरसा शिक्षा व्यवस्था एक सशक्त रूप में खड़ी है।


कब्रिस्तान घेराबंदी और साम्प्रदायिक सौहार्द

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले हिंदू-मुस्लिम झगड़े आम थे। लेकिन 2006 से कब्रिस्तानों की घेराबंदी शुरू की गई, जिससे विवाद खत्म हुए और साम्प्रदायिक सौहार्द कायम हुआ।


दंगों पर सख्ती और पीड़ितों की मदद

भागलपुर दंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2005 में सरकार बनने के बाद दंगों की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की गई और पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा व पेंशन की सुविधा दी गई। उन्होंने बताया कि मुस्लिम तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को 2007 से 10 हज़ार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिसे अब बढ़ाकर 25 हज़ार रुपये कर दिया गया है।


अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बढ़ा बजट

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट वर्ष 2004-05 में 3 करोड़ 54 लाख रुपये था, जो अब बढ़कर 1080 करोड़ रुपये हो गया है। मुस्लिम युवाओं को रोजगार शुरू करने में मदद के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।


सभी तबकों के विकास पर जोर

नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही सभी वर्गों के विकास पर ध्यान दिया है — चाहे हिंदू हों, मुस्लिम हों, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महादलित या सवर्ण। उन्होंने बताया कि हाल ही में सभी वृद्धजनों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं की पेंशन राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी गई है।



बिजली और विकास योजनाएं


उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में राज्य के सभी घरों में बिजली पहुंचा दी गई थी और अब लगभग सभी घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ़्त बिजली दी जा रही है। प्रगति यात्रा के दौरान विकास कार्यों की समीक्षा कर 50 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से 430 नई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिन पर काम शुरू हो चुका है।


मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की समस्याओं का समाधान करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा – “विरोधी लोग जो भी कहें, उसका कोई अर्थ नहीं है। हम काम करते रहते हैं और विकास की राह पर बिहार को आगे ले जाते हैं।”


विशेष सम्मान और स्मारिका विमोचन

समारोह में मुख्यमंत्री का अंगवस्त्र, टोपी और मखाने की माला पहनाकर स्वागत किया गया। साथ ही शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी मुख्यमंत्री ने किया।


कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान, बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सलीम परवेज, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री नौशाद आलम, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, मदरसा कमिटी के सदस्य, शिक्षक और आमजन उपस्थित थे।

Editorial

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