रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने मनाया 41वां स्थापना दिवस, चार दशकों की उपलब्धियों पर डाला प्रकाश


कपूरथला, 20 अगस्त 2025।
रेल डिब्बा कारखाना (आरसीएफ) कपूरथला ने आज अपने गौरवशाली सफर के 40 वर्ष पूरे करते हुए 41वां स्थापना दिवस बड़े धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर आरसीएफ के वारिस शाह हॉल में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरसीएफ के महाप्रबंधक श्री एस.एस. मिश्र ने की, जबकि महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा श्रीमती मधुमिता मिश्र विशिष्ट अतिथि रहीं। इस समारोह में अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ यूनियनों और एसोसिएशनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जैसे गायन, क्लासिकल नृत्य, लोक नृत्य और एकांकी का मंचन किया गया। साथ ही आरसीएफ की यात्रा और उपलब्धियों को दर्शाती एक विशेष फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
आरसीएफ का गौरवशाली सफर
स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में महाप्रबंधक श्री एस.एस. मिश्र ने कहा कि 17 अगस्त 1985 को इस कारखाने की नींव इस उद्देश्य से रखी गई थी कि भारतीय रेल को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई जा सके, रेल डिब्बों के उत्पादन में वृद्धि हो और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों। उन्होंने बताया कि अब तक आरसीएफ ने 47,000 से अधिक रेल डिब्बों का निर्माण किया है और आधुनिक तकनीक से कई ऐसे विश्वस्तरीय कोच बनाए हैं, जिनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो चुकी है।
मिश्र ने कहा कि चार दशकों से आरसीएफ ने लगातार अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया है, उन्नत तकनीकों को अपनाया है और अपने कोच पोर्टफोलियो में विविधता लाई है। इनमें मेमू और एलएचबी डिब्बों से लेकर तेजस, डबल डेकर, नैरो गेज पैनोरमिक डिब्बे, वंदे मेट्रो और वंदे भारत जैसे प्रसिद्ध कोच शामिल हैं। उन्होंने इसे केवल समय के बीतने का प्रतीक नहीं, बल्कि चार दशकों की अभूतपूर्व उपलब्धियों, आधुनिकीकरण और कार्यबल के समर्पण की पहचान बताया।
नए प्रोजेक्ट और चुनौतियां
महाप्रबंधक ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष आरसीएफ को कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिले हैं। इनमें भारतीय रेल की प्रतिष्ठित वंदे भारत ट्रेनसेट, स्व-चालित दुर्घटना राहत रेलगाड़ी के डिब्बे, स्वचालित निरीक्षण ट्रेन और बांग्लादेश रेलवे के लिए निर्यात कोच का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य चुनौतियों से भरा हुआ है, क्योंकि बढ़ते प्रतिस्पर्धा के दौर में आरसीएफ को निर्यात कोचों के साथ-साथ मेट्रो डिब्बों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आरसीएफ हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है और आने वाले समय में भी भारतीय रेल को विश्वस्तरीय योगदान देता रहेगा।
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान
मिश्र ने यह भी रेखांकित किया कि रेल डिब्बा कारखाना न केवल भारतीय रेल के लिए बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि यह कारखाना कपूरथला जिले की लगभग 25 प्रतिशत जीडीपी में योगदान देता है और यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है।
41वें स्थापना दिवस का यह आयोजन आरसीएफ के गौरवशाली इतिहास और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर कर्मचारियों और शहरवासियों के बीच गर्व और उत्साह का माहौल लेकर आया।
Editorial

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