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Parliament Monsoon Session : CM-PM की कुर्सी खतरे में! लोकसभा में पेश हुआ नया बिल
By EditorialPublished on
Parliament Monsoon Session : संसद के मानसून सत्र में बुधवार को जब सरकार ने वह बिल पेश किया, जिसमें प्रावधान है कि अगर कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहता है तो उसकी कुर्सी चली जाएगी, तो लोकसभा का माहौल गरमा गया। बिल पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं। विपक्ष का कहना है कि यह कानून राजनीतिक बदले की भावना से लाया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। वहीं, सरकार का तर्क है कि यह बिल शासन व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बना

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Parliament Monsoon Session में बुधवार का दिन बेहद अहम और तूफानी रहा। लोकसभा में सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े विधेयक पेश किए, जिनमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने का बिल भी शामिल है। जैसे ही यह बिल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में पेश किया, विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं।
ऑनलाइन गेमिंग बिल पर गरमाया माहौल :
Parliament Monsoon Session में सबसे पहले ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 पेश किया गया। इसमें पैसे से जुड़े गेम्स और उनके विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि “ऑनलाइन गेमिंग युवाओं की आत्महत्या और आर्थिक तबाही का बड़ा कारण बन रहा है।” वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे गैर-जरूरी करार दिया और कहा कि सरकार को इसे टैक्स के जरिए रेगुलेट करना चाहिए था।
सत्ता बनाम विपक्ष का टकराव :
इसके बाद Parliament Monsoon Session का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा सामने आया। अमित शाह ने लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश किए –
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025
- केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025
इनके साथ ही वह विवादित विधेयक भी पेश किया गया, जिसमें यह प्रावधान है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिनों से ज्यादा हिरासत में रहता है, तो उसकी कुर्सी चली जाएगी। इस पर विपक्ष ने हंगामा करते हुए कहा कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे जनता के अधिकारों पर हमला बताया।
भाजपा का पलटवार :
भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “यह बिल जनता के हित में है। कोई भी नेता कानून से ऊपर नहीं हो सकता। अगर वह जेल में है तो सत्ता की कुर्सी पर क्यों बैठेगा?” वहीं भाजपा ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया।
संसद में स्थगन और JPC को भेजा गया बिल :
Parliament Monsoon Session के दौरान हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद अमित शाह द्वारा पेश किए गए तीनों अहम विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति (JPC) को भेज दिया गया। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार विरोध करते हुए विधेयकों की प्रतियां गृहमंत्री की ओर फेंकी।
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संसद का यह मानसून सत्र लगातार विवादों और हंगामों से घिरा हुआ है। जहां सरकार इसे पारदर्शी राजनीति और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दे रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि संसद की संयुक्त समिति इन विधेयकों पर क्या रिपोर्ट देती है और यह कानून देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा।
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