पटना जू में ब्लडलाइन चेंज की पहल, इनब्रिडिंग रोकने और पशुओं के संरक्षण की नई कोशिश
संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में पशुओं की सेहत और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल की जा रही है। जू प्रशासन ने नए पशुओं को लाने के बजाय मौजूदा जानवरों की पेयरिंग और ब्लडलाइन चेंज की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य इनब्रिडिंग (एक ही नस्ल के बीच लगातार प्रजनन) को रोकना और उनसे जुड़ी बीमारियों की आशंका को कम करना है।


पटना, 20 अगस्त। संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में पशुओं की सेहत और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल की जा रही है। जू प्रशासन ने नए पशुओं को लाने के बजाय मौजूदा जानवरों की पेयरिंग और ब्लडलाइन चेंज की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य इनब्रिडिंग (एक ही नस्ल के बीच लगातार प्रजनन) को रोकना और उनसे जुड़ी बीमारियों की आशंका को कम करना है।
पटना जू में फिलहाल 1100 जानवर
पटना जू में इस समय 93 प्रजातियों के करीब 1100 जानवर मौजूद हैं। जू प्रशासन का मानना है कि समय-समय पर ब्लडलाइन बदलना बहुत जरूरी है, क्योंकि लगातार एक ही रक्तरेखा के पशुओं के बीच मेटिंग से उनकी सेहत कमजोर हो सकती है, प्रजनन क्षमता घट सकती है और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
अन्य चिड़ियाघरों से आदान-प्रदान
जू प्रशासन ने जानकारी दी कि ब्लडलाइन चेंज के लिए देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से पशुओं के आदान-प्रदान की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल कोलकाता जू से जिराफ लाने की बातचीत चल रही है। इसके अलावा, गैंडों के प्रजनन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। पटना जू में इस समय विश्व में सर्वाधिक गैंडे हैं और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
ब्लडलाइन चेंज के फायदे
-
पशुओं में बीमारियों का खतरा कम होता है
-
सेहत और प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
-
प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है
-
वन्यजीवों में विविधता आती है
-
संरक्षण की प्रक्रिया को मजबूती मिलती है
हालिया सफलताएँ
जू निदेशक हेमंत पाटील ने बताया कि हाल ही में पटना जू में दो स्टार कछुओं का जन्म हुआ है। यह दर्शाता है कि संरक्षण और प्रजनन को लेकर जू प्रशासन की कोशिशें लगातार सफल हो रही हैं।
पटना जू की यह पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ब्लडलाइन चेंज की प्रक्रिया से न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि उनकी प्रजनन क्षमता और संख्या में भी वृद्धि होगी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

