✕
लोकसभा में अमित शाह का बड़ा बयान; बोले, मैंने भी दिया इस्तीफा
By EditorialPublished on 20 Aug 2025 5:30 AM IST
संविधान संशोधन विधेयक : लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिसमें किसी मंत्री के खिलाफ अपराध साबित होने पर 30 दिन के भीतर इस्तीफा देने का प्रावधान शामिल है। इस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया और हंगामा करते हुए बिल की प्रतियां फाड़ दीं। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

x

लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री यदि किसी आपराधिक मामले में फंसता है तो उसे 30 दिनों के भीतर पद से इस्तीफा देना होगा। जैसे ही यह विधेयक सदन में रखा गया, विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार संविधान से छेड़छाड़ कर रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। सदन में “संविधान को मत तोड़ो” जैसे नारे गूंजते रहे और कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
अमित शाह का पलटवार :
हंगामे के बीच अमित शाह ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर भी झूठे आरोप लगे थे, लेकिन उन्होंने खुद नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा, “मैंने तब तक कोई पद नहीं संभाला जब तक अदालत ने मुझे निर्दोष साबित नहीं किया।” शाह के इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और कई सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर सदन में फेंक दीं।
विपक्ष का विरोध :
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी, केसी वेणुगोपाल और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया। मनीष तिवारी ने कहा कि इस बिल का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है और सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने शाह के गुजरात में मंत्री रहते हुए गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। इस पर अमित शाह ने दोबारा स्पष्ट किया कि उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था और बाद में अदालत से निर्दोष साबित हुए थे।
बिल का मकसद :
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस संविधान संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक और प्रशासनिक नैतिकता को मजबूत करना है। अगर कोई मंत्री भ्रष्टाचार या किसी अन्य गंभीर अपराध में फंसता है तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा। शाह ने कहा कि यह कदम सरकार में पारदर्शिता लाने और जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
सदन में हंगामा और कार्यवाही स्थगित :
विपक्षी दलों ने सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया और लगातार हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों ने इसे जनता का ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया। बढ़ते हंगामे को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस बिल पर संसद और राजनीति दोनों में घमासान तेज रहने की पूरी संभावना है।

Editorial
Next Story
Related News
X
