बिहार में 10 वर्षों में 1,445 गोद लिए बच्चों का हुआ पंजीकरण...
पटना, 20 अगस्त। बिहार में बीते 10 वर्षों के दौरान गोदनामा पंजीकरण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2015 से 2024 के बीच राज्य में कुल 1,445 दंपत्तियों ने बच्चों को गोद लेकर उसका पंजीकरण कराया। इनमें से सबसे अधिक 101 पंजीकरण राजधानी पटना में दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर सामने आई है।


पटना, 20 अगस्त। बिहार में बीते 10 वर्षों के दौरान गोदनामा पंजीकरण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2015 से 2024 के बीच राज्य में कुल 1,445 दंपत्तियों ने बच्चों को गोद लेकर उसका पंजीकरण कराया। इनमें से सबसे अधिक 101 पंजीकरण राजधानी पटना में दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर सामने आई है।
गोद लेने की शर्तें
बिहार में बच्चा गोद लेने के लिए कुछ निर्धारित नियम लागू हैं। कोई भी व्यक्ति या दंपत्ति आपसी सहमति से बच्चा गोद ले सकता है।
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यदि बेटा गोद लिया जा रहा है, तो गोद लेने वाले परिवार के पास पहले से बेटा नहीं होना चाहिए।
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इसी तरह बेटी गोद लेने की स्थिति में पहले से उनकी अपनी बेटी नहीं होनी चाहिए।
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गोद लेने वाले पुरुष या महिला की आयु और बच्चे की आयु में कम से कम 21 वर्ष का अंतर होना अनिवार्य है।
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गोद लिए जाने वाले बच्चे की अधिकतम आयु 15 वर्ष तय की गई है।
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साथ ही, बच्चा गोद देने वाले दंपत्ति या व्यक्ति की सहमति भी अनिवार्य है।
गोदनामा पंजीकरण की प्रक्रिया
गोदनामा पंजीकरण के लिए 2,000 रुपये स्टाम्प शुल्क और 1,500 रुपये निबंधन शुल्क निर्धारित है। भले ही पंजीकरण करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन भविष्य की कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
एक बार गोदनामा पंजीकृत हो जाने के बाद इसे रद्द नहीं किया जा सकता। पंजीकरण के बाद गोद लिया बच्चा गोद लेने वाले परिवार की संपत्ति में वही अधिकार प्राप्त करता है, जो किसी जैविक संतान को मिलते हैं। हालांकि, गोद देने वाले परिवार की संपत्ति पर बच्चे का कोई अधिकार नहीं होता। ये नियम केवल हिंदू परिवारों पर लागू होते हैं, जबकि अन्य धर्मों के लिए अलग प्रावधान निर्धारित हैं।
पंजीकरण का महत्व
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार, गोदनामा पंजीकरण न केवल गोद लिए गए बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा करता है, बल्कि गोद लेने वाले माता-पिता को भी भविष्य में किसी कानूनी विवाद से बचाता है। यह प्रक्रिया गोद लिए गए बच्चों को एक सुरक्षित सामाजिक और कानूनी पहचान प्रदान करती है।
बिहार में बढ़ते गोदनामा पंजीकरण इस बात का संकेत देते हैं कि समाज में गोद लेने को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और लोग कानूनी प्रक्रिया को भी गंभीरता से अपना रहे हैं।

