✕
India Russia Oil Trade : क्या खत्म होगी रूस-भारत तेल डील? आया बड़ा अपडेट!
By EditorialPublished on
India Russia Oil Trade : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर नया मोड़ आ गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताते हुए साफ किया है कि भारत का तेल व्यापार राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के मुताबिक जारी

x
India Russia Oil Trade : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने इस दावे को भ्रामक और गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि भारत का रूसी तेल आयात अब भी जारी है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हित, अंतरराष्ट्रीय नियमों और आर्थिक कारकों पर आधारित है।
भारत ने ट्रंप के दावे को बताया गलत :
ANI से बातचीत में सूत्रों ने कहा, “भारत का तेल आयात मूल्य, कच्चे तेल की गुणवत्ता, मौजूदा भंडार, लॉजिस्टिक्स और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर तय होता है। डोनाल्ड ट्रंप का दावा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है, पूरी तरह से गलत है।”
रूस की ऊर्जा शक्ति और भारत की निर्भरता :
रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और निर्यातक है। उसकी दैनिक उत्पादन क्षमता 9.5 मिलियन बैरल है, जो वैश्विक मांग का लगभग 10% है। रूस प्रतिदिन लगभग 4.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 2.3 मिलियन बैरल परिष्कृत उत्पाद निर्यात करता है। मार्च 2022 में जब वैश्विक बाजार में रूस को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, तब ब्रेंट क्रूड की कीमत $137 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति :
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी 85% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत ने G7 और यूरोपीय संघ द्वारा लागू $60 प्रति बैरल के प्राइस कैप का पालन करते हुए रूसी तेल खरीदा।
भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने ईरान और वेनेजुएला से तेल खरीदने से परहेज किया क्योंकि उन पर अमेरिका ने सीधे प्रतिबंध लगाए थे।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
यूरोप का दोहरापन और भारत की भूमिका :
सरकारी सूत्रों ने कहा कि अगर भारत ने रियायती रूसी तेल नहीं खरीदा होता, तो OPEC+ देशों की उत्पादन कटौती के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें $137 प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती थीं। इससे महंगाई और अधिक बढ़ती। वहीं, यूरोपीय संघ ने अब रूसी कच्चे तेल के लिए $47.6 प्रति बैरल की नई मूल्य सीमा तय की है, जो सितंबर से लागू होगी। लेकिन इस दौरान यूरोप खुद रूस से LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का सबसे बड़ा आयातक रहा। रूस के LNG निर्यात का 51% यूरोप ने खरीदा, जबकि चीन 21% और जापान 18% हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
भारत की दो-टूक प्रतिक्रिया :
डोनाल्ड ट्रंप ने ANI को दिए जवाब में कहा था, “मुझे जानकारी मिली है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। अगर ये सही है, तो यह एक अच्छा कदम है। देखते हैं आगे क्या होता है।” इस पर भारत ने साफ किया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है।
यह भी पढे :

Editorial
Next Story
Related News
X
