Rail Wheel Factory
रायबरेली, 2 अगस्त 2025
— भारतीय रेलवे की आधुनिक कोच फैक्ट्री (MCF) के फोर्ज्ड व्हील प्लांट (FWP) ने जुलाई 2025 में उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करते हुए न केवल तय लक्ष्यों को पार किया है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को भी नई गति दी है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूत करती है।


जुलाई में 5000 के लक्ष्य के मुकाबले 5173 पहिए हुए तैयार

फोर्ज्ड व्हील प्लांट ने जुलाई महीने के लिए निर्धारित 5,000 पहियों के मासिक उत्पादन लक्ष्य को पार करते हुए 5,173 पहियों का निर्माण किया। यह सफलता संयंत्र की न सिर्फ तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि वहां कार्यरत कर्मचारियों की निष्ठा और समर्पण का भी प्रमाण है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब देश में रेलवे ढांचे को अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सुसज्जित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।


वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भी लक्ष्य से आगे

वित्तीय वर्ष 2025–26 की पहली चार महीनों में संयंत्र ने कुल 20,261 पहियों का उत्पादन कर लिया है, जबकि इसी अवधि के लिए निर्धारित लक्ष्य 20,000 पहिए थे। यानी उत्पादन लक्ष्य को 261 पहियों से पार किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.1 गुना अधिक है। यह संख्या भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक संकेतक है।

1 अगस्त: संयंत्र के इतिहास का सबसे व्यस्त और सफल दिन

1 अगस्त 2025 को फोर्ज्ड व्हील प्लांट के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब एक ही दिन में 408 पहियों का फोर्जिंग कार्य सफलता से पूरा किया गया। यह संयंत्र का अब तक का सबसे अधिक एकदिनी उत्पादन है। इतना ही नहीं, इसी दिन 504 पहियों का हीट ट्रीटमेंट (उष्मा उपचार) भी पूरा किया गया। यह भी संयंत्र द्वारा एक दिन में किया गया सर्वाधिक हीट ट्रीटमेंट है।

इस रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय रेल की यह इकाई अब वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य कर रही है और भविष्य में भी इसी तरह की उपलब्धियों के लिए तैयार है।

Rail Wheel Factory



नेतृत्व की भूमिका: प्रशांत कुमार मिश्रा की प्रेरक अगुआई

महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्रा की प्रेरणादायी अगुआई में एमसीएफ का यह प्रदर्शन संभव हो पाया है। उन्होंने संयंत्र की पूरी टीम को इस उल्लेखनीय सफलता पर बधाई दी और कहा:

“यह केवल उत्पादन का आंकड़ा नहीं है, यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में हमारा योगदान है। यह उपलब्धि हमारे कर्मचारियों की मेहनत, टीमवर्क और समर्पण का नतीजा है। एमसीएफ देश को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”

Rail Wheel Factory

तकनीकी नवाचार और टीम वर्क बना सफलता की कुंजी

फोर्ज्ड व्हील प्लांट की ये उपलब्धियाँ केवल श्रम और लक्ष्य की पूर्ति नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, आधुनिक मशीनों का उपयोग, उच्च गुणवत्ता की प्रक्रिया और टीम वर्क का परिणाम हैं। संयंत्र में फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसी जटिल प्रक्रियाएं इतनी कुशलता से संचालित हो रही हैं कि उत्पादन की गुणवत्ता भी वैश्विक मानकों के अनुरूप है।


आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊर्जा

एमसीएफ का फोर्ज्ड व्हील प्लांट न केवल भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, बल्कि विदेशों से आयात पर निर्भरता भी लगातार कम कर रहा है। पहले जो फोर्ज्ड व्हील्स आयात किए जाते थे, अब उन्हें देश में ही तैयार किया जा रहा है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत भी हो रही है और देश का औद्योगिक क्षेत्र मजबूत हो रहा है।


एमसीएफ आने वाले महीनों में और भी बड़े लक्ष्य तय करने की योजना बना रहा है। नई तकनीक, संसाधनों का कुशल उपयोग और कर्मचारी प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भविष्य में यह संयंत्र न केवल भारत की रेलवे आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि निर्यात की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Editorial

Editorial

Next Story