पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे को मिला राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 (NE-9) का दर्जा, बिहार के विकास को मिलेगी नई रफ्तार


पटना, 18 अगस्त 2025।
बिहार की सड़कों के विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे को केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा प्रदान कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे को अब से नेशनल एक्सप्रेसवे-9 (NE-9) के रूप में जाना जाएगा। यह न केवल बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे होगा, जो पूरी तरह से राज्य की सीमाओं के भीतर बनाया जाएगा, बल्कि यह देश का नौवां राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे भी होगा।

बिहार के लिए गर्व का क्षण

पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने इस घोषणा को बिहार के लिए ऐतिहासिक और गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा—

“पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे का राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 के रूप में अधिसूचित होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस परियोजना की घोषणा के बाद से कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार से हर संभव सहयोग मिल रहा है और राज्य सरकार भी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ काम कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से पटना से पूर्णिया की दूरी महज 3 घंटे में तय की जा सकेगी, जो अभी लगभग 6–7 घंटे में पूरी होती है। इसके अलावा, यह सड़क सीमांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देगी और रोजगार, व्यापार तथा निवेश के अवसरों में जबरदस्त वृद्धि होगी।

250 किलोमीटर लंबा आधुनिक एक्सप्रेसवे

पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 250 किलोमीटर होगी। यह मार्ग एनएच-22 के मीरनगर अरेज़ी (हाजीपुर) से शुरू होकर नरहरपुर, हरलोचनपुर, बाजिदपुर, सरौंजा, रसना, परोरा और फतेहपुर से गुजरते हुए पूर्णिया जिले के हंसदाह में एनएच-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) से जुड़ेगा।

इस परियोजना में आधुनिक परिवहन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास बनाए जाएंगे। साथ ही, समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा जिला मुख्यालयों को जोड़ने के लिए विशेष संपर्क मार्ग भी तैयार किए जाएंगे।

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 6 जिलों के 29 प्रखंडों के 250 से अधिक गाँवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से की जा रही है। बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने बताया कि भूमि अधिग्रहण का कार्य प्राथमिकता पर पूरा किया जाएगा और इसके बाद निर्माण कार्य त्वरित गति से शुरू कर दिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की कोशिश है कि बिहार के पहले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य बिना किसी देरी के आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में किसानों और भूमि मालिकों को उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा ताकि परियोजना में किसी प्रकार की अड़चन न आए।

120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार

यह एक्सप्रेसवे अत्याधुनिक डिजाइन के आधार पर तैयार किया जाएगा, जिसमें वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और परिवहन सुगम बनेगा।

सीमांचल को नई पहचान

पटना से पूर्णिया तक का यह मार्ग न केवल राजधानी और सीमांचल क्षेत्र के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा, बल्कि उत्तर बिहार और कोसी–सीमांचल क्षेत्र को जोड़कर समग्र आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाएगा। अब तक सीमांचल क्षेत्र को खराब सड़क कनेक्टिविटी और लंबी यात्रा अवधि की वजह से कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे बनने से यहां उद्योग, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

ऐतिहासिक उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देगी। अब तक राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार तो हुआ है, लेकिन एक पूरी तरह राज्य की सीमा के भीतर निर्मित राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा पाना पहली बार हो रहा है। इस वजह से इसे बिहार की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।


पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे का राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 के रूप में दर्जा मिलना न केवल बिहार की सड़क संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा बल्कि सीमांचल क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी देगा। परियोजना पूरी होने पर न केवल पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा सुगम और तेज होगी, बल्कि यह एक्सप्रेसवे बिहार के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

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Editorial

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