अमेरिका से व्यापार वार्ता ठप पड़ने के चलते जूलरी उद्योग में करीब 1.73 लाख कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं। जेम एंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के सर्वे के मुताबिक अगस्त से नवंबर के बीच अमेरिका को कट और पॉलिश हीरे का निर्यात 80% तक घटकर $1.2 बिलियन रह सकता है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह $1.52 बिलियन था।


जूलरी सेक्टर पर संकट
मुंबई। अमेरिका से व्यापार वार्ता ठप पड़ने के चलते जूलरी उद्योग में करीब 1.73 लाख कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं। जेम एंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के सर्वे के मुताबिक अगस्त से नवंबर के बीच अमेरिका को कट और पॉलिश हीरे का निर्यात 80% तक घटकर $1.2 बिलियन रह सकता है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह $1.52 बिलियन था। अप्रैल तक अमेरिका में भारतीय हीरे पर कोई ड्यूटी नहीं थी, लेकिन अब 25% आयात शुल्क लगाया गया है। स्टडेड जूलरी पर शुल्क 5-7% से बढ़कर 32% तक पहुंच गया है। ट्रंप प्रशासन ने अगस्त में कुल 50% टैरिफ लगाया, जिससे श्रम-प्रधान जूलरी निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भारत दुनिया के 90% से ज्यादा हीरों को काटता और चमकाता है तथा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान की फैक्ट्रियों में करीब 9.6 लाख लोग कार्यरत हैं। इनमें से अनुमानित 1.73 लाख लोग अगले कुछ महीनों में बेरोजगार हो सकते हैं। अकेले कट-पॉलिश हीरे के कारोबार से 79,520 नौकरियां जाने का अंदेशा है। पिछले वित्त वर्ष में हीरे का निर्यात $13.26 बिलियन रहा था, जो कुल जूलरी निर्यात $29.9 बिलियन का लगभग 42% है। अमेरिका भारत के कट-पॉलिश हीरों के निर्यात में औसतन 40% हिस्सेदारी रखता है। भारत डायमंड बोरस के अध्यक्ष अनुप मेहता ने कहा कि यदि समझौता और ज्यादा देर तक अटका तो अमेरिकी जूलरी कंपनियां उत्पादन कहीं और शिफ्ट करने पर मजबूर हो सकती हैं।
Editorial

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