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राजस्व महाअभियान का कमाल; रिकॉर्ड संख्या में जमाबंदी प्रतियां बांटी गईं
By EditorialPublished on
बिहार में चल रहे राजस्व महाअभियान ने महज तीन दिनों में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 16 से 18 अगस्त तक पूरे राज्य में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों को सौंपी गईं। सबसे ज्यादा वितरण शेखपुरा जिले में हुआ, जबकि जहानाबाद और कैमूर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज गांव में ही उपलब्ध कराना और कागजातों में मौजूद त्रुटियों का त्वरित सुधार करना है।

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बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महाअभियान ने महज तीन दिनों में बड़ी सफलता हासिल की है। 16 से 18 अगस्त के बीच राज्यभर में कुल 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं। इस उपलब्धि ने अभियान को नई ऊंचाई दी है और ग्रामीणों को जमीन से जुड़े दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
जमाबंदी पंजी वितरण में शेखपुरा अव्वल :
जमाबंदी पंजी के वितरण में शेखपुरा जिला पहले स्थान पर रहा। यहां कुल जमाबंदी के 24.02 फीसदी प्रतियां वितरित की गईं। दूसरे नंबर पर जहानाबाद रहा, जहां 14.48 फीसदी वितरण हुआ। तीसरे नंबर पर कैमूर (13.78 फीसदी), चौथे पर नवादा (13.72 फीसदी) और पांचवें पर पूर्णिया (11.35 फीसदी) रहा।
छठे स्थान पर अररिया रहा जहां 11.16 फीसदी जमाबंदी पंजी वितरित हुई। सातवें नंबर पर खगड़िया (11.15 फीसदी), आठवें पर वैशाली (10.41 फीसदी), नौवें पर गोपालगंज (10.28 फीसदी) और दसवें स्थान पर किशनगंज (9.29 फीसदी) रहा।
राज्यभर में हुआ 6.41 फीसदी जमाबंदी पंजी का वितरण :
राज्य के 38 जिलों में कुल जमाबंदी पंजी की संख्या 3 करोड़ 59 लाख 88 हजार 935 है। इनमें से केवल तीन दिनों में 23 लाख 08 हजार 574 प्रतियां बांटी गई हैं। यह कुल जमाबंदी का 6.41 फीसदी है। यह आंकड़ा बताता है कि महाअभियान किस तेजी से आगे बढ़ रहा है।
गांव–गांव पहुंची राजस्व विभाग की टीमें :
अभियान के तहत राजस्व विभाग की टीमें गांव–गांव जाकर ग्रामीणों को उनकी जमीन से संबंधित जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही मौके पर ही आवेदन प्रपत्र भी दिए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
कागजातों की अशुद्धियों का होगा सुधार :
इस अभियान के दौरान जमीन के अभिलेखों में मौजूद त्रुटियों का त्वरित सुधार किया जा रहा है। साथ ही, बंटवारा नामांतरण, उत्तराधिकार नामांतरण और छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने का काम भी तेजी से चल रहा है।
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ग्रामीणों को मिल रही राहत :
राजस्व महाअभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रामीणों को सुविधा देना है। अब उन्हें अपने जमीन से जुड़े दस्तावेज दफ्तरों के चक्कर लगाकर नहीं बल्कि गांव में ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल समय और धन की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
बिहार सरकार का यह कदम भूमि सुधार और पारदर्शिता की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। केवल तीन दिनों में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी प्रतियों का वितरण दिखाता है कि विभाग ने इस अभियान को मिशन मोड में चलाया है। आने वाले दिनों में यह महाअभियान और भी बड़ी सफलता दर्ज कर सकता है।

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