बिहार में 17,942 ग्रामीण पथों का कायाकल्प: मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना से गांवों की बदल रही तस्वीर
बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना (एमएमजीएसयूवाई) के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में 17,942 ग्रामीण पथों के कायाकल्प का कार्य शुरू हो चुका है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 30,627 किलोमीटर है और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब इनका तेजी से पुनर्निर्माण किया जा रहा है।


पटना, 18 अगस्त। बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना (एमएमजीएसयूवाई) के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में 17,942 ग्रामीण पथों के कायाकल्प का कार्य शुरू हो चुका है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 30,627 किलोमीटर है और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब इनका तेजी से पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
यह योजना सिर्फ ग्रामीण सड़कों के संधारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और सामाजिक सशक्तिकरण का एक मजबूत जरिया भी बन गई है। गांवों को हर मौसम में (बारहमासी) निर्बाध संपर्क और बाजार, स्कूल तथा अस्पतालों तक सहज पहुंच उपलब्ध हो रही है, जिससे ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता तेजी से सुधर रही है।
अब तक 11,985 सड़कों पर काम शुरू
ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार, 17,942 स्वीकृत सड़कों में से अब तक 11,985 सड़कों (कुल लंबाई 20,998 किलोमीटर) पर कार्यारंभ हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी स्वीकृत ग्रामीण सड़कों का प्रारंभिक सुधार कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 तक पूरा कर लिया जाए।
इस परियोजना के साथ मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम भी लागू किया गया है। यह योजना ग्रामीण सड़कों की दीर्घकालिक मजबूती और प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है।
सड़क निर्माण में नई तकनीक और मजबूती पर जोर
इस कार्यक्रम के तहत सभी ग्रामीण पथों का दो बार कालीकरण किया जाएगा ताकि सड़कों की सतह लंबे समय तक मजबूत बनी रहे और यातायात सुगमता से चलता रहे। इसके अलावा, सभी संवेदकों (कॉन्ट्रैक्टर्स) को “रूरल रोड रिपेयर वाहन” रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत मरम्मत कर यात्रियों को असुविधा से बचाया जा सके।
राज्य सरकार ने यह भी तय किया है कि हर वित्तीय वर्ष के बाद पांच वर्षीय अनुरक्षण अवधि से बाहर हुई सड़कों का चयन कर उन्हें पुनः उन्नत किया जाएगा। इससे न केवल सड़कों की गुणवत्ता बनी रहेगी बल्कि ग्रामीण इलाकों में सड़क नेटवर्क का स्थायित्व भी कायम रहेगा।
सबसे ज्यादा काम मधुबनी और मुजफ्फरपुर में
जिन जिलों की ग्रामीण सड़कों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें सबसे अधिक संख्या मधुबनी और मुजफ्फरपुर की है। दोनों जिलों में 1,001-1,001 सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है। मधुबनी की सड़कों की कुल लंबाई 1,757.146 किलोमीटर है जबकि मुजफ्फरपुर की 1,656.49 किलोमीटर।
समस्तीपुर में 926 सड़कों (कुल लंबाई 1,422.844 किमी), गया में 836 (कुल लंबाई 1,599.927 किमी), पूर्वी चंपारण में 899, पटना में 709, वैशाली में 732 और सिवान में 704 सड़कों को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार पूरे राज्य के हर जिले में ग्रामीण संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में गंभीर और ठोस कदम उठा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति
नई सड़कों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंख लग गए हैं। किसानों को अब अपने कृषि उत्पादों को बाजार तक ले जाने में सुविधा हो रही है। समय पर फसल की आपूर्ति से उपज की गुणवत्ता बनी रहती है और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है।
इसके साथ ही, दुग्ध व्यवसाय, छोटे ग्रामीण उद्योग और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ने से वहां के परिवारों की आय में सीधा असर देखा जा रहा है।
रोजगार के अवसर और सामाजिक बदलाव
इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। बड़ी संख्या में मजदूरों और स्थानीय युवाओं को काम मिला है। सड़कों की बेहतर उपलब्धता ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान कर दी है, जिससे सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिला है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना साकार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना है कि राज्य के किसी भी सुदूर इलाके से राजधानी पटना तक की दूरी महज चार घंटे में तय की जा सके। नई और मजबूत ग्रामीण सड़कों के निर्माण से यह लक्ष्य धीरे-धीरे हकीकत बनता जा रहा है।
बिहार सरकार का यह प्रयास सिर्फ सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक उत्थान की एक बड़ी पहल साबित हो रहा है।

