महाराष्ट्र में बड़ा धमाका; उद्धव-राज ठाकरे साथ आए!
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। ठाकरे बंधु उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अब साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार (15 अगस्त) को नासिक में यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले महाराष्ट्र नगर पालिका चुनाव में ठाकरे बंधु मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नासिक में एक साथ लड़ेंगे।
संजय राउत ने इस दौरान बीजेपी पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार "तालिबानी प्रवृत्ति" की है। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन महाराष्ट्र और मराठी एकता के लिए बना है और ठाकरे बंधु ने इसके लिए तलवार उठा ली है।
सालों बाद भाई-भाई की एकजुटता :
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में सियासी दूरी देखी गई थी, लेकिन 5 जुलाई को दोनों ने एक साथ मंच साझा करके हलचल मचा दी। यह मंच साझा करना वर्षों बाद हुआ, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में कयासों का दौर शुरू हो गया।
इसके बाद 27 जुलाई को उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर राज ठाकरे ‘मातोश्री’ पहुंचे और मुलाकात की। इन घटनाओं ने गठबंधन की अटकलों को और हवा दी। अब संजय राउत के इस औपचारिक ऐलान ने इन अटकलों को सियासी हकीकत में बदल दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी पर भी साधा निशाना :
संजय राउत ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए भाषण पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज देश जिन ऊंचाइयों पर है, उसमें पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं का योगदान है। राउत ने कहा, “अगर देश आधुनिक बना है तो यह इन नेताओं के विजन का नतीजा है।”
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उन्होंने आगे कहा, “मिस्टर मोदी ने स्वदेशी का नारा दिया, लेकिन यह पंडित नेहरू और महात्मा गांधी का ही विजन है। अब तो आपको गांधी टोपी पहनकर भाषण देने में भी देर नहीं लगेगी। आप धीरे-धीरे गांधीवाद और नेहरूवाद की तरफ जा रहे हैं।”
महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बदलने के आसार :
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे बंधु की एकजुटता महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। खासकर मुंबई और मराठी बहुल क्षेत्रों में यह गठबंधन बीजेपी-शिंदे सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। नगर पालिका चुनावों में ठाकरे बंधु का साथ आना न केवल शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के वोट बैंक को मजबूत करेगा, बल्कि विपक्षी खेमे की ताकत भी बढ़ाएगा।
Editorial

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