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UP विधानसभा में गूँजा PDA ; सपा पर निशाना साधा
By EditorialPublished on
यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा जुबानी हमला किया। सपा के सियासी फॉर्मूले पर तंज कसते हुए सीएम योगी ने नया PDA फुलफॉर्म पेश किया, जिससे सदन में हलचल मच गई।

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यूपी विधानसभा के मानसून सत्र में 14 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जोरदार जुबानी हमला बोला। सत्र के दौरान सीएम ने सपा के सियासी फॉर्मूले “PDA” की नई परिभाषा देते हुए कहा कि यह “परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी” है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का लक्ष्य सिर्फ परिवार का विकास करना है, जबकि जनता के विकास की कोई चिंता नहीं।
सीएम योगी ने शायराना अंदाज में सपा पर वार किया— "बड़ा हसीन है इनकी जुबान का जादू, लगाकर के आग बहारों की बात करते हैं।" उन्होंने कहा कि विपक्ष कूपमंडूक (कुएं के मेंढक) की तरह सीमित सोच रखता है और उसकी नीतियां केवल अपने परिवार तक सीमित हैं।
2017 से पहले अराजकता और भ्रष्टाचार :
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने वर्ष 2017 तक सपा सरकार के कार्यकाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला था। किसी भी नौकरी में बिना रिश्वत काम नहीं होता था। लेकिन आज स्थिति बदल गई है। अब बिना भेदभाव और तुष्टीकरण के सबके संतुष्टीकरण पर जोर दिया जा रहा है और सरकारी योजनाओं का लाभ सभी को समान रूप से मिल रहा है।
राज्य की उपलब्धियां :
यूपी विधानसभा में सीएम ने राज्य की प्रगति पर जोर देते हुए कहा कि आज प्रदेश की सोच और दिशा में सार्थक बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और पिछले 11 वर्षों में 11वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंचा है।
यूपी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 1947 से 2017 तक, कुछ अपवाद छोड़कर, राज्य की स्थिति गंभीर रही। उद्योगों पर ताले लटके रहे, नदियां और श्रमबल होने के बावजूद विकास की गति धीमी रही। 2016-17 में यूपी की राष्ट्रीय जीडीपी में भागीदारी 8% रह गई थी, जो 1950-60 के दशक में 14% थी।
आर्थिक मोर्चे पर बदलाव :
सीएम योगी ने कहा कि आजादी के समय यूपी की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के बराबर थी, लेकिन 2017 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल एक-तिहाई रह गई। 2017 से पहले राज्य का निर्यात मात्र 84 हजार करोड़ रुपये था और बजट केंद्रीय करों पर निर्भर था। नीति आयोग की फिस्कल रिपोर्ट में यूपी को पिछड़े राज्यों में गिना जाता था।
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आज हालात बिल्कुल बदल गए हैं। सीएम ने बताया कि 2016-17 तक यूपी की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने जा रही है। अब यूपी बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के तौर पर खुद को स्थापित कर चुका है।
विपक्ष को सीधी चुनौती :
अपने भाषण के अंत में सीएम योगी ने यूपी विधानसभा से ही विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि जनता अब भेदभाव और परिवारवाद से मुक्त विकास चाहती है। सरकार का लक्ष्य केवल कुछ परिवारों को नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश को आगे ले जाना है।

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