लाल किले पर बिहार का मान बढ़ाएंगे 10 पंचायतों के मुखिया
स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनहित कार्यों में नई मिसाल कायम करने वाली बिहार की 10 पंचायतों के मुखिया इस वर्ष 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने विभिन्न मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने के आधार पर इन पंचायतों का चयन किया है। बुधवार को चयनित प्रतिनिधि राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।


पटना, 14 अगस्त — स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनहित कार्यों में नई मिसाल कायम करने वाली बिहार की 10 पंचायतों के मुखिया इस वर्ष 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने विभिन्न मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने के आधार पर इन पंचायतों का चयन किया है। बुधवार को चयनित प्रतिनिधि राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
इनमें मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड की जजुआर मध्य पंचायत के सुमन नाथ ठाकुर, नालंदा के एकंगरसराय की पारथु पंचायत की कुमारी तृप्ति, जहानाबाद के मखदुमपुर की पनहाड़ा पंचायत की निभा कुमारी, समस्तीपुर के रोसड़ा की मोतीपुर पंचायत की प्रेमा देवी, पटना के फुलवारीशरीफ की कुरकुरी पंचायत के रवि कुमार, रोहतास की टुम्बा पंचायत के वीरेंद्र कुमार सिंह, मधेपुरा के आलमनगर की खुरहान पंचायत की मंजु देवी, बक्सर के डुमरांव की कोरन सराय पंचायत की कांति देवी, गया के टिकारी की संडा पंचायत के रामजी शर्मा और गया के कोंच की गरारी पंचायत की पूजा कुमारी शामिल हैं।
इन पंचायतों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने, बायोगैस के उपयोग, जल संचय, जैविक कचरे से खाद निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से महिला मुखियाओं की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही है, जिन्होंने बुनियादी ढांचे के सुधार, समावेशी विकास और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया है।
इन पंचायतों ने हर घर जल, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर नवाचार और जनसहभागिता के जरिए गांवों में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
15 अगस्त को लाल किले पर इन पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी न केवल बिहार के लिए गर्व का क्षण होगी, बल्कि यह ग्रामीण नेतृत्व की बढ़ती ताकत और विकास की नई सोच का भी प्रतीक बनेगी। यह सम्मान उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग से बड़े बदलाव ला रहे हैं।

