पटना, 13 अगस्त।
बिहार में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पटना और राजगीर में अत्याधुनिक साइबर फॉरेंसिक लैब (CFL) की स्थापना अगले चार से छह महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इन लैबों के शुरू होने के बाद साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच की गति चार गुना बढ़ जाएगी। यह जानकारी एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।

एडीजी ने बताया कि इन दोनों साइबर फॉरेंसिक लैब की स्थापना गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) के सहयोग से की जा रही है। इसके लिए एनएफएसयू के साथ एक विशेष एमओयू (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एनएफएसयू की टीम तकनीकी सहायता, कंसल्टेंसी सेवा, उपकरणों की तकनीकी विशिष्टता तय करने और यहां कार्यरत कर्मियों को प्रशिक्षण देने का काम करेगी। शुरुआत में दोनों यूनिट के छह कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।


13.66 करोड़ रुपये की मंजूरी


एडीजी पारसनाथ ने बताया कि गृह विभाग से इन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और 13 करोड़ 66 लाख 52 हजार रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। इसके बाद उपकरणों की खरीद, लैब सेटअप और संचालन का काम तेज़ी से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले मामलों में ऑडियो-वीडियो सबूतों के लिए फॉरेंसिक सहायता अनिवार्य कर दी गई है, जिससे इन लैबों की अहमियत और बढ़ गई है।


बढ़ते साइबर अपराध से निपटने की बड़ी पहल

राज्य में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। एडीजी ने बताया कि 2022 में साइबर अपराध के 1606 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में 200% बढ़कर 4801 हो गए। 2024 में यह आंकड़ा 5721 तक पहुंच गया और इस वर्ष मई तक ही 3258 नए मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों में डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, बैंक धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग, फिशिंग, फर्जी कस्टमर केयर कॉल और पहचान की चोरी जैसी वारदातें प्रमुख हैं।


साइबर हेल्पलाइन पर लाखों शिकायतें

साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। 2024-25 में इस हेल्पलाइन पर 25 लाख कॉल आए थे। इस वर्ष अब तक 94 हजार शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से 80 हजार वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित हैं।


वर्तमान व्यवस्था और नई सुविधा का असर

पटना की विधि-विज्ञान प्रयोगशाला में वर्तमान में एक साइबर शाखा कार्यरत है, जहां मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीसीटीवी फुटेज आदि की तकनीकी जांच होती है। 2024 में यहां 255 मामलों से संबंधित तकनीकी प्रदर्श जांच के लिए आए, जिनमें 135 मामलों की जांच पूरी की गई। वहीं, जुलाई 2025 तक 206 प्रदर्श जांच के लिए आए, जिनमें से 75 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। नई साइबर फॉरेंसिक लैब शुरू होने के बाद जांच की गति और क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

पटना और राजगीर में बनने वाली ये दोनों अत्याधुनिक लैब न केवल राज्य में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में मदद करेंगी, बल्कि डिजिटल सबूतों के विश्लेषण में भी बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर देंगी।

Editorial

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