महात्मा गांधी की हत्या का जिक्र कर बोले राहुल गांधी;
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 13 अगस्त को पुणे की एमपी/एमएलए कोर्ट में एक गंभीर दावा किया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि उनकी जान को खतरा है और इस खतरे को देखते हुए उन्हें प्रिवेंटिव प्रोटेक्शन यानी पहले से सुरक्षा प्रदान की जाए। राहुल गांधी ने यह अपील मानहानि के एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जो सावरकर से जुड़े उनके 2023 के लंदन भाषण पर आधारित है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
सावरकर मानहानि केस और खतरे की वजह :
राहुल गांधी ने कोर्ट में कहा कि मानहानि केस के शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने खुद को नाथूराम गोडसे का वंशज बताया है। कांग्रेस सांसद के अनुसार, यह वंशावली एक हिंसक विचारधारा से जुड़ी है, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचने या झूठे आरोप में फंसाए जाने का खतरा है। राहुल गांधी ने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और हाल के संघर्षों को देखते हुए उनकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
राजनीतिक बयानों से बढ़ा विवाद :
राहुल गांधी ने अपने हालिया राजनीतिक बयानों का जिक्र किया, जिनमें “वोट चोर सरकार” का नारा, चुनावी गड़बड़ियों के सबूत पेश करना, और संसद में कहना कि “सच्चा हिंदू हिंसक नहीं होता” शामिल है। उनका दावा है कि इन बयानों के कारण उन्हें बीजेपी नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी और धमकियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह भी उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है और कोर्ट को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
केस का पृष्ठभूमि :
यह मामला मार्च 2023 के लंदन भाषण से जुड़ा है। उस भाषण में राहुल गांधी ने एक घटना का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सावरकर ने अपनी किताब में लिखा है कि वह और उनके पांच-छह साथी एक मुस्लिम व्यक्ति को पीट रहे थे और इस पर सावरकर को खुशी हुई थी। शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने इसे झूठा और मानहानिपूर्ण बताया था और कोर्ट में केस दर्ज कराया था।
वकील का तर्क :
राहुल गांधी के वकील मिलिंग पवार ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता सत्यकी का सावरकर और गोडसे के परिवार से संबंध है और वह अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कारण से राहुल गांधी के खिलाफ झूठे केस बनाए जा सकते हैं और उनकी जान को भी खतरा है।
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अगली सुनवाई :
इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। तब तक कोर्ट यह विचार करेगा कि राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर प्रिवेंटिव प्रोटेक्शन देने की जरूरत है या नहीं। इस घटनाक्रम ने आंध्र प्रदेश और दिल्ली की राजनीतिक हलचल के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। "राहुल गांधी सुरक्षा" अब सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर ट्रेंड करता नजर आ रहा है, क्योंकि यह मुद्दा न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सुरक्षा और न्यायिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम हो गया है।
Editorial

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