पटना, 12 अगस्त:
बिहार में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विकास और निवेश को नई गति देने के लिए बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने ‘बिहार लॉजिस्टिक्स नीति 2023’ लागू कर दी है। इस नीति के तहत निवेशकों और उद्यमियों को कई बड़े वित्तीय और संरचनात्मक लाभ दिए जा रहे हैं, जिससे बिहार को देश का प्रमुख लॉजिस्टिक हब बनाने की दिशा में मजबूती मिल रही है।

लॉजिस्टिक इकाइयों के लिए पूंजीगत अनुदान

बिहार लॉजिस्टिक्स नीति 2023 के अनुसार, राज्य में अचल पूंजी निवेश करने वाले निवेशकों को पूंजीगत निवेश अनुदान मिलेगा। इसमें अचल पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹25 करोड़ तय है। इसके अलावा विभिन्न इकाइयों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं —

  • इनलैण्ड कंटेनर डिपो : अधिकतम ₹10 करोड़

  • वेयरहाउस : अधिकतम ₹6 करोड़

  • कोल्ड चेन व्यवस्था : अधिकतम ₹4 करोड़

  • कंटेनर फ्रेट स्टेशन : अधिकतम ₹3 करोड़


ब्याज प्रतिपूर्ति की सुविधा

नीति के तहत निवेशकों को 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्रतिपूर्ति दी जाएगी। यह सुविधा अचल पूंजी निवेश की अधिकतम 50 प्रतिशत राशि तक उपलब्ध होगी और इसकी अधिकतम सीमा ₹30 करोड़ तय की गई है।


पूर्व की नीतियों का लाभ भी जारी

बिहार लॉजिस्टिक्स नीति 2023 के तहत निवेश करने वाले उद्यमियों को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 के अंतर्गत मिलने वाले सभी लाभ भी मिलेंगे। इसका मतलब है कि निवेशकों को नई नीति के साथ-साथ 2016 की नीति में उपलब्ध सभी प्रोत्साहनों का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के लिए भी विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।


विशेष वर्ग के लिए अतिरिक्त लाभ

अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अति पिछड़ा वर्ग (EBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), महिला, दिव्यांगजन, युद्ध विधवा, एसिड अटैक पीड़ित और थर्ड जेंडर के लिए ब्याज प्रतिपूर्ति की दर 11.5 प्रतिशत तय की गई है। साथ ही, पूंजीगत अनुदान एवं ब्याज प्रतिपूर्ति की सीमा सामान्य श्रेणी की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक होगी।

बिहार सरकार का मानना है कि इस नीति के जरिए राज्य में लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ी से विकास होगा, बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

Editorial

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