Pune News : मस्जिद पर भगवा झंडा; सोशल पोस्ट से भड़की हिंसापुणे जिले के दौंड तहसील के यवत गांव में बीते कुछ दिनों से बढ़ रहा तनाव आखिरकार 1 अगस्त को हिंसा में तब्दील हो गया। शुरुआत 27 जुलाई को हुई थी, जब एक युवक ने कथित तौर पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति से छेड़छाड़ की और उसके बाद एक आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे इलाके में आक्रोश फैल गया, जो धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गया।
भीड़ का उग्र रूप, मस्जिद पर पथराव और झंडा लहराना :
गुरुवार को हालात उस समय बिगड़ गए जब उग्र भीड़ युवक के घर पहुंच गई और वहां तोड़फोड़ की। पुलिस द्वारा तितर-बितर करने पर भीड़ पास की एक मस्जिद की ओर बढ़ गई। भीड़ ने मस्जिद पर पथराव किया और फिर मीनार पर छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर वाला भगवा झंडा फहरा दिया। कुछ उपद्रवियों ने आगजनी भी की और आसपास की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले, भारी सुरक्षा बल तैनात :
स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: सीएम देवेंद्र फडणवीस का बयान :
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रारंभिक जांच के अनुसार किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा आपत्तिजनक स्टेटस डाला गया, जिससे माहौल बिगड़ा। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसे भड़काऊ स्टेटस डालते हैं, ताकि समाज में तनाव फैले। लेकिन कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं है। सभी समुदायों के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
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क्या है पूरा मामला ?
  • 27 जुलाई: युवक पर शिवाजी महाराज की मूर्ति तोड़ने का आरोप
  • 31 जुलाई: सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक फोटो वायरल
  • 1 अगस्त: भीड़ का हिंसक रूप, युवक के घर और मस्जिद पर हमला
  • पुलिस कार्रवाई: लाठीचार्ज, आंसू गैस, सुरक्षा बढ़ाई गई
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में :
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि हालात काबू में हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर माहौल को शांतिपूर्ण बनाने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर निगरानी तेज कर दी गई है ताकि और कोई अफवाह न फैले।
Editorial

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