भारतीय फैक्ट्रियों की रफ्तार तेज; PMI ने छुआ नया शिखर
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने जुलाई 2025 में ज़बरदस्त वापसी करते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती दिखाई है। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) जून के 58.4 से बढ़कर 59.1 पर पहुंच गया है। यह मार्च 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है और यह संकेत देता है कि भारत का औद्योगिक उत्पादन अब तेज़ी से विकास की राह पर लौट रहा है।
लगातार दूसरे महीने 58 से ऊपर बना रहा इंडेक्स :
यह लगातार दूसरा महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग PMI 58 से ऊपर बना रहा है। यह आंकड़ा इस ओर इशारा करता है कि उत्पादन, नए ऑर्डर्स और मांग में लगातार तेजी बनी हुई है। किसी भी PMI का 50 से ऊपर रहना विस्तार (expansion) को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे जाने पर उसे संकुचन (contraction) माना जाता है।
HSBC रिपोर्ट : बिक्री और उत्पादन में रिकॉर्ड ग्रोथ
HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, कुल बिक्री लगभग 5 वर्षों में सबसे तेज़ गति से बढ़ी है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 15 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। HSBC इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “इस बढ़त का मुख्य कारण नए ऑर्डर्स और उत्पादन में तेजी है।”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विनिर्माता आने वाले 12 महीनों में भी उत्पादन में सकारात्मक ग्रोथ को लेकर आश्वस्त हैं, हालांकि समग्र भावना तीन वर्षों के निचले स्तर पर है।
लागत और कीमतों का दबाव बढ़ा :
तेज़ी के इस दौर में कच्चे माल की लागत में भी इज़ाफा हुआ है। एल्युमिनियम, रबर, इस्पात और चमड़े जैसी सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से कंपनियों को अपनी उत्पाद दरें भी बढ़ानी पड़ी हैं। यह स्थिति ग्राहकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन उद्योग के लिए यह संकेत है कि मांग स्थिर बनी हुई है।
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PMI कैसे तय होता है ?
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI को S&P Global द्वारा तैयार किया जाता है। यह डेटा लगभग 400 विनिर्माण कंपनियों से एकत्र किए गए प्रश्नों के उत्तरों के आधार पर तैयार किया जाता है, जिसमें उत्पादन, नए ऑर्डर, रोजगार, डिलीवरी समय और इनपुट स्टॉक जैसे पहलू शामिल होते हैं।
क्या कहती है ये रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में ?
यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत का औद्योगिक आधार अब वैश्विक चुनौतियों से उबर रहा है और घरेलू मांग, निवेश और उत्पादन तीनों में संतुलन बन रहा है। ऐसे समय में जब कई विकसित देश आर्थिक मंदी की आशंका से जूझ रहे हैं, भारत का यह प्रदर्शन एक भरोसेमंद आर्थिक संकेत बनकर उभरा है।
Editorial

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