फाइटर जेट क्रैश के बाद मलबे का क्या होता है? जानें प्रक्रिया..
राजस्थान के चूरू जिले में रतनगढ़ कस्बे के पास बुधवार दोपहर करीब 1:25 बजे बड़ा हादसा हुआ, जब भारतीय वायुसेना का एक जगुआर फाइटर जेट भानोदा गांव के पास खेतों में क्रैश हो गया। इस हादसे में जेट में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई। हादसे के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जेट के मलबे में लगी आग बुझाने का कार्य शुरू किया।
घटनास्थल पर जेट का मलबा खेतों में दूर-दूर तक फैल गया था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। इस हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा कि ऐसे विमान हादसों के बाद जो मलबा बचता है, उसका क्या किया जाता है? क्या इसे मौके पर ही छोड़ दिया जाता है या फिर उसे हटाया जाता है? आइए जानते हैं इस प्रक्रिया के बारे में।
प्लेन क्रैश के तुरंत बाद क्या होता है ?
किसी भी विमान हादसे के बाद सबसे पहले संबंधित इमरजेंसी सर्विसेज को एक्टिव किया जाता है। पुलिस घटनास्थल को तुरंत घेरकर सील कर देती है ताकि कोई आम व्यक्ति, मीडिया या बाहरी व्यक्ति वहां जाकर सबूतों के साथ छेड़छाड़ न कर सके।
इसके बाद एयरफोर्स और संबंधित जांच एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचती हैं और वहां पर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (Black Box) जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों को खोजने का कार्य करती हैं। यह उपकरण यह पता लगाने में मदद करते हैं कि विमान हादसा किस वजह से हुआ।
मलबे के साथ क्या किया जाता है ?
हादसे में जो मलबा बचता है, वह सिर्फ कबाड़ नहीं होता बल्कि जांच का अहम हिस्सा होता है। सबसे पहले एजेंसियां मलबे की बारीकी से जांच करती हैं और उसके महत्वपूर्ण पुर्जों को इकट्ठा करती हैं। इन पुर्जों को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है ताकि देखा जा सके कि कोई तकनीकी खराबी तो नहीं थी या फिर कोई पुर्जा फेल तो नहीं हुआ था।
जब जांच पूरी हो जाती है और मलबे की आवश्यकता खत्म हो जाती है, तब बचे हुए मलबे को स्क्रैप मानकर उसे हटाया जाता है। कई बार इन पुर्जों को सरकारी नीलामी के जरिए बेच दिया जाता है या फिर स्क्रैप के रूप में डिस्पोज कर दिया जाता है।
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क्यों जरूरी होती है मलबे की जांच ?
मलबे की जांच से भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के उपाय तैयार किए जाते हैं। मलबे में छुपे छोटे-छोटे सुराग हादसे के असली कारणों का खुलासा कर सकते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां बेहद सावधानी से हर हिस्से की बारीकी से जांच करती हैं। चूरू में हुए इस हादसे के बाद वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठा दी है, जो हादसे की वजहों का पता लगाएगी। फिलहाल घटनास्थल पर मलबे की जांच चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के असली कारण सामने आ सकेंगे।
Editorial

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