झुंझुनूं (राजस्थान) | विशेष संवाददाता
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बागवाली क्षेत्र में रविवार को भारी बारिश के बाद एक नई बनी स्टेट हाईवे सड़क बह जाने की घटना ने प्रशासनिक तंत्र और निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, यह वही स्टेट हाईवे है जो अब तक उद्घाटन का इंतजार कर रहा था, लेकिन प्राकृतिक आपदा से पहले ही उसकी पोल खुल गई।


झुंझुनूं से सीकर को जोड़ने वाली यह स्टेट हाईवे महज छह महीने पहले ही बनाई गई थी, और बारिश के पहले ही बड़े दौर में बहकर नदी में समा गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि काटली नदी का तेज बहाव सड़क को बहा ले गया। इतना ही नहीं, सड़क के साथ ही एक बिजली का खंभा भी नदी में समा गया, जिससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।



मौसम विभाग की चेतावनी पहले से थी

मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी इलाके में 88 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस बारिश का असर काटली नदी के जलस्तर पर पड़ा और नदी उफान पर आ गई। बागवाली क्षेत्र से गुजर रही यह नई स्टेट हाईवे, जो नदी के ऊपर से होकर जाती थी, पानी के दबाव को सहन नहीं कर सकी और ध्वस्त हो गई।



सड़क के बहने का वीडियो हुआ वायरल

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घटना का वीडियो स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शूट किया गया, जिसमें देखा जा सकता है कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा तेज बहाव के साथ नदी में समा रहा है। जैसे-जैसे यह वीडियो इंटरनेट पर फैला, जनाक्रोश भी तेज होता गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताएं बरती गईं।



ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जांच और पुनर्निर्माण की मांग

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण काटली नदी के किनारे एकत्रित हुए और उन्होंने प्रदर्शन कर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य केवल कागजों पर मजबूत दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में घटिया सामग्री से सड़क बनाई गई थी, जो पहली बारिश में ही बह गई।

ग्रामीणों ने यह भी जोर दिया कि अब यदि इस सड़क का पुनर्निर्माण किया जाता है, तो वह केवल तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।



लोक निर्माण विभाग की टीम करेगी निरीक्षण

इस घटना के बाद, लोक निर्माण विभाग (PWD) हरकत में आया है और विभाग की टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करने वाली है। विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता, डिज़ाइन और सामग्री की जांच की जाएगी। यदि � ेकेदार की गलती पाई गई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



� ेकेदारों की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस परियोजना को जल्दबाजी में पूरा किया गया था, ताकि समय सीमा के अंदर निर्माण पूरा कर भुगतान लिया जा सके। लोगों ने आरोप लगाया कि � ेकेदारों ने कागजी रिपोर्टों में तो निर्माण को उच्च गुणवत्ता का बताया, लेकिन वास्तव में रेतीले मटेरियल और कमजोर फाउंडेशन के कारण सड़क इतनी जल्दी टूट गई।




विशेषज्ञों की राय: डिज़ाइन में थी खामी

इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क का आधार मजबूत होता और पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होती, तो ऐसा हादसा नहीं होता। कई मामलों में देखा गया है कि क्लेमेटिक इम्पैक्ट का आकलन किए बिना ही पुल और सड़कें बना दी जाती हैं, जो ऐसी आपदाओं में टिक नहीं पातीं।

Editorial

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