भारत बंद का असर; बंगाल से केरल तक हंगामा।
देशभर में बुधवार को ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। नई श्रम संहिताओं के विरोध में नेशनल ट्रेड यूनियन ने इस हड़ताल का आह्वान किया था, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसी घटनाएं सामने आईं। पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और कई अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें और रेलवे स्टेशन जाम करने की कोशिश की, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
केरल में हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दिखा। कोयंबटूर में सड़कों पर चलने वाली तमाम बसों को रोका गया, वहीं कोझीकोड में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह ठप नजर आया। कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद रहे और कोच्चि की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। राज्य के कई हिस्सों में चक्का जाम की कोशिशें की गईं।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने जादवपुर में पैदल मार्च निकाला और भारत बंद में सक्रिय भागीदारी निभाई। जादवपुर रेलवे स्टेशन पर लेफ्ट यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन के अंदर घुस गए और ट्रेनों के संचालन को बाधित करने की कोशिश की। कोलकाता के अन्य हिस्सों में भी बंद का असर दिखाई दिया। कुछ जगहों पर आगजनी और सड़क जाम की घटनाएं भी सामने आईं। हालांकि पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए कई स्थानों पर तत्काल कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस भारत बंद में करीब 25 करोड़ कर्मचारी शामिल हुए। हड़ताल का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए श्रम कानून हैं। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इन नई श्रम संहिताओं से कर्मचारियों के अधिकारों पर असर पड़ेगा। उनका मानना है कि इससे काम के घंटे बढ़ जाएंगे और कंपनियों को तो फायदा होगा, लेकिन कर्मचारियों की स्थिति और खराब हो जाएगी। इसके अलावा हड़ताल करना भी मुश्किल होगा और रोजगार तथा वेतन को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी।
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इस बंद को देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), सेफ्ल एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF), और ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC) शामिल हैं।
कई राज्यों में बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित हुईं और सार्वजनिक परिवहन आंशिक रूप से ठप रहा। हालांकि कुछ जगहों पर सामान्य जीवन पर इसका असर सीमित रहा, लेकिन बड़े शहरों और औद्योगिक इलाकों में इसका असर खासा दिखा। सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
Editorial

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