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बिहार में वोटर लिस्ट पर घमासान; ओवैसी ने EC से मांगा जवाब
By EditorialPublished on 7 July 2025 5:30 AM IST
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने पूछा है कि जब 2024 में नई मतदाता सूची तैयार की गई थी, तो अब दोबारा इसे अपडेट करने की क्या जरूरत है। उन्होंने इस कदम को लेकर चुनाव आयोग से सफाई मांगी है और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की मतदाता सूची को लेकर सियासत गरमा गई है। चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान की प्रक्रिया शुरू करने के बाद से विपक्षी दलों ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया की वैधता पर अपनी चिंता जताई है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं और अदालत ने भी इस पर संज्ञान लिया है।
ओवैसी ने EC से मिलकर जताई आपत्ति :
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद मीडिया से कहा कि वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया में किसी भी राष्ट्रीय दल से चर्चा नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को इस प्रक्रिया के लिए ठीक से प्रशिक्षित भी नहीं किया गया है क्योंकि उनके पास हैंडबुक तक नहीं है।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब 2024 की नई मतदाता सूची बनाई गई थी और लोगों ने उसमें वोट डाला था, तो फिर 2025 के चुनाव के लिए उन्हीं मतदाताओं से उनकी पहचान दोबारा क्यों मांगी जा रही है। उन्होंने कम समय में इस प्रक्रिया को पूरा करने की कोशिश पर भी सवाल उठाया और इसे अव्यवस्थित बताया।
माइग्रेंट लेबर की स्थिति पर चिंता :
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग जो प्रवासी मजदूर (माइग्रेंट लेबर) हैं, उनके पास स्थायी दस्तावेज नहीं होते। ऐसे में अगर उनसे वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए तुरंत दस्तावेज मांगे जाते हैं तो उनका नाम सूची से हटने का खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा :
वोटर लिस्ट अपडेट करने के इस अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक 5 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। इनमें प्रमुख रूप से Association for Democratic Reforms (ADR), योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, मनोज झा और मुजाहिद आलम शामिल हैं। इन सभी याचिकाओं में चुनाव आयोग की प्रक्रिया को मनमाना बताया गया है और आशंका जताई गई है कि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम लिस्ट से हट सकते हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और 10 जुलाई 2025 को सुनवाई तय की है। कोर्ट के इस हस्तक्षेप से यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
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क्या है असली चिंता ?
विपक्ष का आरोप है कि इतनी जल्दबाजी में वोटर लिस्ट अपडेट करने से कई पात्र मतदाताओं का नाम छूट सकता है, खासकर गरीब और प्रवासी वर्ग के लोग प्रभावित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि वह चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है।
अब नजर 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है, जहां तय होगा कि बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर उठ रहे इन सवालों का समाधान कैसे निकलेगा।

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