भूकंपों से थर्राया जापान; भविष्यवाणी ने बढ़ाई दहशत
जापान इन दिनों भूकंपों और अफवाहों के दोहरे डर के साए में जी रहा है। पिछले दो हफ्तों में देश में 1000 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं, जिसने आम लोगों से लेकर प्रशासन तक को चिंता में डाल दिया है। इसी बीच, एक लोकप्रिय मंगा कॉमिक बुक में की गई भविष्यवाणी ने लोगों की दहशत और बढ़ा दी है। इस कॉमिक बुक में 5 जुलाई को कयामत जैसा दिन बताया गया है, और संयोग से आज वही तारीख है। सोशल मीडिया पर इस भविष्यवाणी को लेकर चर्चाएं तेज हैं और अफवाहों का बाजार गर्म है।

कॉमिक बुक की भविष्यवाणी से बढ़ा डर :
कॉमिक बुक में की गई इस भविष्यवाणी को लेकर लोग काफ़ी घबराए हुए हैं। कई लोगों का मानना है कि जापान में जल्द ही कोई बड़ी आपदा आ सकती है। हालात ऐसे हैं कि न सिर्फ जापान के लोग, बल्कि दुनियाभर के पर्यटक भी जापान आने के प्लान को टाल रहे हैं।
टूरिज्म इंडस्ट्री पर इसका सीधा असर पड़ा है। जहां अप्रैल में जापान घूमने के लिए रिकॉर्ड 39 लाख टूरिस्ट पहुंचे थे, वहीं अब यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। हांगकांग से आने वाले पर्यटकों में 11% की कमी दर्ज की गई है और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
टोकारा द्वीप समूह में सबसे ज्यादा असर :
भूकंपों का सबसे ज्यादा असर जापान के टोकारा द्वीप समूह में देखा गया है। यहाँ करीब 700 लोग रहते हैं और इलाके में अस्पताल जैसी सुविधाएं सीमित हैं, जिससे हालात और ज्यादा चिंताजनक हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भूकंप से पहले समुद्र से अजीब तरह की गर्जना जैसी आवाज सुनाई देती है, जिससे डर और बढ़ जाता है। एक निवासी ने बातचीत में कहा, "सोते वक्त भी डर लगता है, ऐसा लगता है जैसे धरती हर समय हिल रही है।"
क्या है मंगा की भविष्यवाणी ?
मंगा जापान में बेहद लोकप्रिय कॉमिक बुक सीरीज है। कई लोग दावा करते हैं कि इस मंगा ने पहले भी प्राकृतिक आपदाओं की सही भविष्यवाणी की है। 2011 में जब जापान में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था और विनाशकारी सुनामी से करीब 20,000 लोग मारे गए थे, तब भी कहा गया था कि इस आपदा की भविष्यवाणी 1999 में छपी मंगा के पहले संस्करण में की गई थी।
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सरकारी एजेंसियां शांत, लोग बेचैन :
हालांकि, जापान की आधिकारिक आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने इन भविष्यवाणियों को गंभीरता से नहीं लिया है और कहा है कि भूकंपों के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। फिर भी, लगातार हो रहे भूकंपों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के कारण लोग घबराए हुए हैं और भविष्य को लेकर आशंकित हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 5 जुलाई के बाद हालात सामान्य होंगे या फिर डर और भी बढ़ेगा।
Editorial

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