रिजिजू ने दिया दलाई लामा का साथ; चीन ने दिखाई तल्खी
भारत के केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की दलाई लामा उत्तराधिकारी को लेकर की गई टिप्पणी से चीन भड़क गया है। शुक्रवार (4 जुलाई, 2025) को चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत को तिब्बत से संबंधित मामलों में ‘सावधानी बरतने’ और ‘चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप’ न करने की चेतावनी दी है।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत को 14वें दलाई लामा की "चीन विरोधी अलगाववादी प्रकृति" को समझना चाहिए और तिब्बत (जिसे चीन शिजांग कहता है) से संबंधित मामलों में अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए।
रिजिजू का बयान और चीन की प्रतिक्रिया :
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 3 जुलाई को कहा था कि अगले दलाई लामा का चयन केवल स्थापित धार्मिक संस्था और स्वयं दलाई लामा द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी अन्य देश या शक्ति का दखल नहीं होगा। यह पहली बार था जब भारत सरकार के किसी मंत्री ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी।
उनकी यह टिप्पणी तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी संस्था 'गादेन फोडरंग ट्रस्ट' ही उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देगी।
चीन ने क्यों जताई आपत्ति ?
चीन का कहना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन के लिए पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, स्वर्ण कलश से निकाला गया भाग्य पत्र और केंद्र सरकार (चीनी सरकार) की मंजूरी अनिवार्य है। माओ निंग ने दावा किया कि मौजूदा 14वें दलाई लामा का चयन भी इन्हीं प्रक्रियाओं के तहत हुआ था।
चीन का यह भी कहना है कि दलाई लामा और पंचेन लामा जैसे तिब्बती बौद्ध धर्म के उच्चतम पदों के उत्तराधिकार का फैसला केवल चीन के कानूनी और धार्मिक ढांचे के तहत होना चाहिए।
भारत-चीन संबंधों पर असर :
चीन ने भारत को चेताया है कि वह तिब्बत के मुद्दे पर सावधानी से बयानबाजी करे ताकि दोनों देशों के बीच हाल ही में संबंध सुधार के जो प्रयास हुए हैं, उन पर असर न पड़े।
बीते कुछ वर्षों में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के चलते दोनों देशों के रिश्तों में तनाव रहा है। हालांकि, हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच कई उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं। पिछले साल रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से संबंध सामान्य करने के प्रयास तेज हुए हैं।
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धार्मिक आयोजन में शामिल होंगे भारतीय मंत्री :
6 जुलाई को धर्मशाला में दलाई लामा के 90वें जन्मदिन के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और राजीव रंजन सिंह भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। रिजिजू ने साफ किया है कि यह एक धार्मिक आयोजन है, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भारत और चीन के बीच एक बार फिर कूटनीतिक टकराव सामने आया है। भारत जहां दलाई लामा की धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन कर रहा है, वहीं चीन इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल मान रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
Editorial

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