मालेगांव ब्लास्ट :
Malegaon Blast Case Swami Ramabhadracharya Statement 2025: मालेगांव बम धमाके के 17 साल बाद आए कोर्ट के फैसले ने देशभर में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। एनआईए की विशेष अदालत ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद जहां एक ओर इसे न्याय की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस फैसले के बहाने कांग्रेस पर भी तीखे हमले शुरू हो गए हैं।
मालेगांव ब्लास्ट; NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपी बरी किए
स्वामी रामभद्राचार्य की तीखी प्रतिक्रिया :
तुलसीपीठाधीश्वर और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, "आज मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। कोर्ट का यह निर्णय सत्य की जीत है। कांग्रेस का काला चिट्ठा अब जनता के सामने आ चुका है। इन लोगों के पास कोई भी ठोस सबूत नहीं था, फिर भी उन्होंने निर्दोषों को आतंकवादी साबित करने की कोशिश की।"
स्वामी रामभद्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि हिंदू कभी आतंकवादी नहीं रहा और न ही रहेगा। "इतिहास गवाह है कि भगवाधारी कभी आतंकी नहीं रहा। कांग्रेस ने केवल सनातन धर्म को कलंकित करने की साजिश रची थी, जिसका अब अंत हो चुका है। यह हमारी विजय है। इन सातों निर्दोषों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर मानहानि का मुकदमा करना चाहिए।"
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी बोला हमला :
अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और यूपीए शासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा: "जहां धर्म है, वहां विजय निश्चित है। मालेगांव बम विस्फोट का मामला बहुत जटिल था, लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक हथियार बनाकर साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों को सालों तक जेल में डाले रखा। 'हिंदू आतंकवाद' की जो परिभाषा गढ़ी गई थी, वह पूरी तरह से झूठी साबित हो चुकी है। कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए।"
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कोर्ट ने क्या कहा ?
मुंबई की एनआईए विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर सका। मोटरसाइकिल से बम विस्फोट होने का दावा सिद्ध नहीं हुआ और न ही यह साबित हो सका कि बाइक साध्वी प्रज्ञा के कब्जे में थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि UAPA की धाराएं इस केस में लागू नहीं होतीं।
Malegaon Blast Case Swami Ramabhadracharya Statement 2025 इस बात का प्रतीक बन गया है कि कैसे धार्मिक पहचान को राजनीतिक हथियार बनाकर इस्तेमाल करने की कोशिश की गई थी। अब जब कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है, तो यह साफ हो गया है कि 'हिंदू आतंकवाद' की थ्योरी एक प्रोपेगेंडा थी। स्वामी रामभद्राचार्य और संत समाज की प्रतिक्रियाएं इस फैसले को न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी एक बड़ी जीत मान रही हैं।
Editorial

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