Nuvama Wealth Raid : नुवामा वेल्थ पर IT रेड, जेन स्ट्रीट से लिंक की जांच तेज
Nuwama Wealth Raid 2025 :
टैक्स और शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी कार्रवाई में इनकम टैक्स विभाग ने गुरुवार को नुवामा वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (पूर्व में एडलवाइस ब्रोकिंग) के मुंबई स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की। यह छापेमारी जेन स्ट्रीट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में की गई है, जो पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार में विवादों में घिरी हुई है।
नुवामा वेल्थ भारत में अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट की ऑन-ग्राउंड ट्रेडिंग पार्टनर के रूप में काम करती थी। इस कार्रवाई ने बाजार और वित्तीय गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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सेबी से बैन हटने के बाद IT की छापेमारी :
इस रेड का टाइमिंग भी खास है क्योंकि पिछले ही हफ्ते जेन स्ट्रीट से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा लगाया गया ट्रेडिंग प्रतिबंध हटा लिया गया था। सेबी ने यह कदम तब उठाया जब जेन स्ट्रीट ने 4,843.57 करोड़ रुपये एक एस्क्रो अकाउंट में जमा करने की सहमति दी जिसे कथित रूप से "अवैध लाभ" माना गया था।
21 जुलाई को द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जेन स्ट्रीट ने सेबी की सभी शर्तों को पूरा करते हुए यह रकम जमा करा दी है। इसके बाद SEBI ने कंपनी पर लगा प्रतिबंध हटा लिया, लेकिन मामले की कानूनी जांच अब भी जारी है।
क्या हैं आरोप ?
सेबी के अनुसार, जेन स्ट्रीट ने शेयर बाजार में हेरफेर किया और डेरिवेटिव सेगमेंट में गड़बड़ी फैलाई। आरोप है कि कंपनी ने दिन की शुरुआत में निफ्टी बैंक के शेयरों और फ्यूचर्स को बड़ी मात्रा में खरीदकर कीमतें बढ़ाईं, और फिर शाम को ऑप्शन सेगमेंट में गिरती कीमतों से मुनाफा कमाया।
सेबी का कहना है कि जेन स्ट्रीट को पहले से यह जानकारी होती थी कि निफ्टी बैंक किस समय गिरेगा, जिससे वह मुनाफा कमा लेती थी जबकि दूसरे ट्रेडर्स नुकसान झेलते थे। इसके चलते SEBI ने 3 जुलाई 2025 को कंपनी पर प्रतिबंध लगाते हुए उस पर 4,843.57 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। इस राशि को एस्क्रो अकाउंट में जमा करना अनिवार्य किया गया था।
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IT विभाग क्यों आया हरकत में ?
इनकम टैक्स विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या जेन स्ट्रीट और उससे जुड़ी भारतीय कंपनियों, खासकर नुवामा वेल्थ, के बीच हुए वित्तीय लेन-देन में टैक्स चोरी या हेरफेर की कोई आशंका है। यह छापेमारी इस संदेह के आधार पर की गई कि अवैध लाभ को टैक्स से बचाने के लिए जटिल वित्तीय संरचनाओं का उपयोग किया गया। सूत्रों के अनुसार, IT टीम ने नुवामा के कई कर्मचारियों से पूछताछ की है और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज व डिजिटल डेटा को जब्त किया है।
Nuwama Wealth Raid 2025 केस केवल एक ट्रेडिंग विवाद नहीं, बल्कि भारतीय वित्तीय सिस्टम में विदेशी निवेश और नियमन की पारदर्शिता से जुड़ा मामला बनता जा रहा है। इस छापेमारी से स्पष्ट है कि भारतीय एजेंसियां अब केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जटिल लेन-देन की तह तक जाने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कार्रवाई से और कौन-कौन से बड़े नाम जांच के घेरे में आते हैं।
Editorial

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