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मुंबई। देश में सोने की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ जूलरी कारोबारियों ने आयकर से बचने के लिए अकाउंटिंग नियमों में हेरफेर कर मुनाफा कम दिखाने की कोशिश की है। आयकर विभाग ने कुछ ऐसे जूलरी यूनिट्स की पहचान की है जिन्होंने इन्वेंटरी की वैल्यूएशन पद्धति बदलकर जानबूझकर लाभ को कम दर्शाया और कम टैक्स चुकाया।
सूत्रों के अनुसार, यह तरीका पिछले 5-6 वर्षों से अपनाया जा रहा था। एक प्रमुख जूलर को तो आय छुपाने के चलते करीब रु.100 करोड़ का टैक्स भरना पड़ा है। इन जूलरी कारोबारियों ने इन्वेंटरी वैल्यूएशन के लिए पहले उपयोग में आने वाली एफआईएफओ (फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट) पद्धति की बजाय एलआईएफओ (लास्ट-इन-फर्स्ट-आउट) पद्धति अपना ली, जिससे उनके क्लोजिंग स्टॉक की वैल्यू घट गई और मुनाफा कम दिखा। क्लोजिंग स्टॉक की वैल्यू सीधे लाभ को प्रभावित करती है – कम स्टॉक वैल्यू का अर्थ होता है कम मुनाफा और इस प्रकार कम टैक्स देयता। चूंकि सोने की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, विभाग को संदेह है कि कई जूलर इस अवसर का लाभ उठाकर टैक्स से बचने के लिए एलआईएफओ पद्धति का उपयोग कर रहे हैं। इसीलिए विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे मामलों की जांच करें जहां एलआईएफओ लागू किया गया हो।
वर्ष 2016-17 से आयकर अधिनियम के तहत आईसीडीएस-II (इनकम कम्प्यूटेशन एंड डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड्स) लागू होने के बाद, कारोबारियों को इन्वेंटरी वैल्यूएशन के लिए केवल एफआईएफओ या वेटेड एवरेज कॉस्ट पद्धति की अनुमति है। कोर्ट में इस प्रावधान को चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत ने आईसीडीएस-II को वैध ठहराया और एलआईएफओ के उपयोग की मांग खारिज कर दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते बाजार में इन्वेंटरी वैल्यूएशन का तरीका बदलने से लाभ की पहचान का समय प्रभावित हो सकता है। लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन्वेंटरी की वैल्यू से सीधे लाभ उत्पन्न नहीं होता, बल्कि यह केवल व्यापारिक परिणामों की गणना की प्रक्रिया का एक चरण है।
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है — 2019 में रु.35,000 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 2021 में रु.48,720 और 2024 में रु.77,913 तक पहुंचा। वर्तमान में यह रु.97,681 प्रति 10 ग्राम है।
केपीबी एंड एसोसिएट्स के चार्टर्ड अकाउंटेंट परस सावला ने बताया कि “आई-टी विभाग के पास यह अधिकार है कि वह असेसी द्वारा बनाए गए लेखा-जोखा का परीक्षण कर यह निर्धारित करे कि क्या वह उपयुक्त है और क्या उससे सही मुनाफा निकलता है। आईसीडीएस-II केवल ऐसी इन्वेंटरी के लिए वैकल्पिक पद्धति की अनुमति देता है जो सामान्यतः एक-दूसरे से विनिमेय न हों। लेकिन जहां बड़ी मात्रा में आम तौर पर विनिमेय वस्तुएं जैसे आभूषण मौजूद हों, वहां एलआईएफओ पूरी तरह प्रतिबंधित है। ”अब यह देखना होगा कि आयकर विभाग इस हेरफेर के कितने मामलों का खुलासा करता है और आगे कितनी वसूली होती है।
Editorial

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