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मुंबई। ‘मुंबई द्वीप’ के नाम से पहचानी जाने वाली दक्षिण मुंबई के नागरिकों को मेट्रो के लिए और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। भूमिगत मेट्रो-3 के अंतिम चरण की सुरक्षा जांच अब तक शुरू नहीं हुई है, जिसके चलते इस मार्ग के अगस्त में शुरू होने की समय-सीमा चूकने की आशंका है। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल), जो केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त कंपनी है, इस मार्ग का निर्माण कर रही है।
मेट्रो-3 मुंबई के पश्चिमी उपनगरों को उत्तर-दक्षिण दिशा में जोड़ने वाला मार्ग है। इसका आरे-जेवीएलआर से बीकेसी तक का पहला चरण, जिसमें 10 स्टेशन और 12.99 किलोमीटर की दूरी शामिल थी, ढाई साल की देरी से पिछले वर्ष अक्टूबर में यात्रियों के लिए शुरू हुआ। इसके बाद 6 स्टेशनों और 10 किलोमीटर की दूरी का दूसरा चरण धारावी से आचार्य अत्रे चौक (वरली नाका) तक था, जो दो महीने की देरी से मई में शुरू हुआ। अब 11 स्टेशनों और 10 किलोमीटर की दूरी वाला अंतिम चरण, महालक्ष्मी से कफ परेड होते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक रहेगा। इसी चरण के माध्यम से यह मार्ग वास्तव में उत्तर-दक्षिण को जोड़ेगा। इस चरण को अगस्त में शुरू किया जाना था, ऐसा कहा गया था, लेकिन अब इसमें देरी के संकेत हैं।
अंतिम चरण के सुरक्षा निरीक्षण में देरी
मेट्रो मार्ग को यात्रियों के लिए शुरू करते समय मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) का प्रमाणपत्र आवश्यक होता है। इसके लिए आयुक्तालय द्वारा मार्ग, स्टेशन और मेट्रो डिब्बों का यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से गहन निरीक्षण किया जाता है। उनके निरीक्षण के आधार पर मेट्रो बनाने वाली कंपनी को आवश्यक बदलाव करने होते हैं। उसके बाद सीएमआरएस द्वारा सेवा शुरू करने हेतु प्रमाणपत्र दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए संबंधित कंपनी को सीएमआरएस के पास आवेदन कर उन्हें निरीक्षण के लिए आमंत्रित करना होता है। सीएमआरएस को आमंत्रित करने से पहले मेट्रो रेक की सभी प्रकार की अंतिम परीक्षण प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। मेट्रो-3 के संबंध में महालक्ष्मी से कफ परेड तक मेट्रो की अंतिम परीक्षण प्रक्रिया अब तक हुई ही नहीं है। इसी कारण कंपनी ने अब तक सीएमआरएस को सुरक्षा निरीक्षण के लिए आमंत्रित नहीं किया है, ऐसा सूत्रों ने बताया है।

बड़ी तादाद में यात्री संख्या की उम्मीद

इस मेट्रो मार्ग को दूसरे चरण में सिद्धिविनायक मंदिर से जोड़ा गया, जिससे यात्री संख्या में कुछ वृद्धि हुई है। अब देरी से शुरू हो रहे इस अंतिम चरण में सीएसएमटी, मंत्रालय और विधान भवन जैसे स्टेशन शामिल हैं, जो दक्षिण मुंबई में रोजाना आने-जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए सुविधाजनक होंगे। इस स्थिति में यह चरण इस मार्ग को बड़ी यात्री संख्या प्रदान करने वाला माना जा रहा है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
Editorial

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