रिश्वत के खिलाफ बोला तो मिली तालिबानी सज़ा – पुलिस ने गुप्तांग पर मारी लातें, नंगा कर थाने के बाहर फेंका...
लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार और प्रशासन के खिलाफ शिकायत करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब वही अधिकार उन्हें अपमान, अत्याचार और हैवानियत के गर्त में धकेल दे, तो सवाल उठता है कि क्या हम सच में एक लोकतांत्रिक राज्य में रह रहे हैं? यह मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक गरीब किसान के बेटे ने सब-इंस्पेक्टर कपिल नागर के खिलाफ ₹20,000 की रिश्वत मांगने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कर दी। लेकिन यह शिकायत युवक की जिंदगी की सबसे भयावह गलती बन गई।पुलिस ने गुप्तांग पर


मथुरा, उत्तर प्रदेश — लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार और प्रशासन के खिलाफ शिकायत करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जब वही अधिकार उन्हें अपमान, अत्याचार और हैवानियत के गर्त में धकेल दे, तो सवाल उठता है कि क्या हम सच में एक लोकतांत्रिक राज्य में रह रहे हैं?
यह मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक गरीब किसान के बेटे ने सब-इंस्पेक्टर कपिल नागर के खिलाफ ₹20,000 की रिश्वत मांगने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कर दी। लेकिन यह शिकायत युवक की जिंदगी की सबसे भयावह गलती बन गई।
शिकायत का खौफनाक बदला - पुलिस ने गुप्तांग पर मारी लातें
सीएम पोर्टल पर शिकायत होते ही सब-इंस्पेक्टर कपिल नागर बौखला उठा। उसने पीड़ित युवक को पुलिस चौकी बुलाया। वहाँ जो हुआ, उसने इंसानियत की सारी सीमाएं लांघ दीं। युवक को न सिर्फ बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसके गुप्तांगों पर बार-बार लात मारी गई, जब तक वह लगभग बेहोशी की हालत में नहीं पहुँच गया।
पीड़ित के परिजनों ने मिन्नतें कीं, दया की भीख माँगी, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा। उल्टा उन पर चिल्लाकर भगा दिया गया। युवक जब दर्द से बिलखते हुए बेहोश हुआ, तब भी कपड़े तक नहीं पहनाए गए और उसे थाने के सामने निर्वस्त्र हालत में फेंक दिया गया।
कोई मेडिकल सहायता नहीं दी गई
सबसे शर्मनाक बात ये रही कि युवक को कोई मेडिकल मदद तक नहीं दी गई। पुलिस खुद यह सुनिश्चित करती रही कि किसी डॉक्टर या नर्स तक को बुलाया न जाए। जब हालत बेकाबू हो गई तो उसके माता-पिता और कुछ परिजन, उसके सिर्फ गुप्तांग को ढकते हुए उसे गोद में उठाकर अस्पताल ले गए।
सवाल मुख्यमंत्री से
अब सवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से है —
क्या सीएम पोर्टल पर भ्रष्टाचार की शिकायत करना अब तालिबानी सज़ा पाने का कारण बन गया है?
क्या “जनसुनवाई” सिर्फ दिखावा है?
क्या प्रदेश में पुलिस अब मित्र नहीं, अत्याचारी बन चुकी है?
यह कोई मामूली मारपीट का मामला नहीं है। यह राज्य प्रायोजित हिंसा है, जिसमें एक गरीब किसान का बेटा इसलिए शिकार बना क्योंकि उसने हिम्मत करके रिश्वतखोरी के खिलाफ आवाज उठाई।
लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्र में गुस्सा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे “जंगलराज की पराकाष्ठा” कहा है। लोगों का कहना है कि अगर गरीब नागरिकों को सीएम पोर्टल पर शिकायत करने पर इस तरह की बर्बरता सहनी पड़ेगी, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है?
क्या होगा न्याय?
अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी बाकी हजारों मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।
अगर इस घटना पर चुप्पी साध ली गई, तो यह न केवल उस युवक के साथ अन्याय होगा, बल्कि हर उस नागरिक के अधिकारों की हत्या होगी जो भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने की हिम्मत रखता है।

