संसद में जया का सवाल;
संसद के मॉनसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। बुधवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ सांसद जया बच्चन ने इस ऑपरेशन के नाम को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस सैन्य कार्रवाई का नाम "सिंदूर" रखना उन महिलाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिनके पतियों ने आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई।
जया बच्चन ने बेहद भावनात्मक लहजे में कहा – “सर, सिंदूर तो उजड़ गया… जिनकी पत्नियां रह गईं, जिनके घर उजड़ गए, उनके दर्द का सम्मान कहां है? आप लोगों ने ऐसा नाम क्यों चुना जो उन परिवारों को बार-बार उसी पीड़ा की याद दिलाए?”
उनके इस सवाल से राज्यसभा में सन्नाटा छा गया। उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसे नाम तय करने वालों के पास शायद संवेदनशीलता की कमी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक भावनात्मक घाव है जिसे सरकार ने नासमझी से कुरेदा है।
ऑपरेशन सिंदूर: आखिर सवाल क्या है ?
बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई थी। सभी लोग कश्मीर घूमने आए पर्यटक थे। इस हमले की ज़िम्मेदारी TRF नाम के आतंकी संगठन ने ली थी। इसके बाद भारतीय सेना ने सीमापार जवाबी कार्रवाई करते हुए "ऑपरेशन सिंदूर" नाम से आतंकियों के लॉन्चपैड्स को निशाना बनाया।
सरकार की ओर से इसे आतंक के खिलाफ निर्णायक जवाब बताया गया था, लेकिन इस ऑपरेशन के नाम को लेकर कई विपक्षी नेता सवाल उठा चुके हैं।
जया बच्चन का सरकार से सवाल :
जया बच्चन ने कहा – “आपने 370 हटाते वक्त कहा था कि अब आतंकवाद खत्म होगा। वो भरोसा लेकर लोग कश्मीर घूमने गए थे। सरकार ने जो वादा किया, क्या वो निभाया गया? उन 25 लोगों को आप नहीं बचा पाए।”
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उन्होंने कहा कि सरकार को उन परिवारों से माफी मांगनी चाहिए थी। “उनका भरोसा टूटा है और ये सरकार की जिम्मेदारी थी कि वो उन्हें सुरक्षित रखती। अब तो कम से कम शर्म के साथ माफी मांग लीजिए,” उन्होंने कहा।
नाम पर संवेदनशीलता की मांग :
जया बच्चन के मुताबिक, “ऐसे ऑपरेशन के नाम सोच-समझकर रखने चाहिए, ताकि वो किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं। ऑपरेशन की सफलता अपनी जगह है, लेकिन शब्दों का चयन भी सरकार की जिम्मेदारी है।”
Editorial

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