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Earthquake and Tsunami Alert : भूकंप से पहले क्यों बौखलाते हैं जानवर? वजह चौंकाने वाली है
By EditorialPublished on
रूस (Russia) और जापान (Japan) में आए शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) और सुनामी (Tsunami) की दहशत के बीच एक रहस्यमयी सवाल फिर चर्चा में है क्या जानवरों को भूकंप या सुनामी का आभास पहले हो जाता है? क्या कुत्तों का भौंकना, पक्षियों का अचानक उड़ना या हाथियों का बेकाबू हो जाना कोई चेतावनी संकेत है? आधुनिक विज्ञान इस विषय पर लगातार रिसर्च कर रहा है, वहीं गरुड़ पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी ऐसे संकेतों का उल्लेख मिलता है. क्या जानवरों के व्यवहार में अचानक आए बदलाव से आपदा का पूर्वाभास मिल सकता है? इस रिपोर्ट में
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रूस और जापान में हाल ही में आए भयानक भूकंप और त्सुनामी के बाद दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी प्रणाली पर फिर चर्चा तेज हो गई है। पर क्या आपने गौर किया है कि कई बार जानवर इन आपदाओं से पहले अजीब व्यवहार करने लगते हैं? यह केवल संयोग नहीं है, बल्कि विज्ञान और भारतीय शास्त्रों दोनों में इसका उल्लेख मिलता है।
जानवरों का आपदा पूर्वाभास कोई कल्पना नहीं, बल्कि रिसर्च और प्राचीन ज्ञान दोनों का सम्मिलन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप या त्सुनामी से पहले पृथ्वी में कुछ कंपन, इंफ्रासाउंड (बहुत धीमी ध्वनि तरंगें), और विद्युत चुंबकीय तरंगें उत्पन्न होती हैं। इंसान इन्हें नहीं पहचान पाता, लेकिन जानवरों की इंद्रियां इतनी संवेदनशील होती हैं कि वे इन बदलावों को महसूस कर सकते हैं।
अंडमान में हाथी, त्सुनामी से पहले पहाड़ों की ओर भागे, चीन के नानजिंग शहर में 1975 में भूकंप से पहले जानवरों के अजीब व्यवहार को देखकर पूरे शहर को खाली कराया गया, जिससे हजारों जानें बच गईं। भारत, जापान, चीन और इंडोनेशिया जैसे भूकंप-प्रवण देशों में ऐसी घटनाएं बार-बार दर्ज हुई हैं।
गरुड़ पुराण भी कहता है :
"आपदां पशवो गृह्णंति पूर्वं लक्षणतश्च वै" (पशु-पक्षी आपदा के लक्षण पहले ही पहचान लेते हैं)
कौन-कौन से जानवर क्या संकेत देते हैं ?
- कुत्ते: अचानक भौंकना, दरवाजे या दीवार की ओर घूरना
- हाथी: झुंड में ऊंचाई की ओर दौड़ लगाना
- पक्षी: झुंड में दिशा बदलकर उड़ना
- सांप: ठंड में भी बिलों से बाहर आना
- चींटियां: तेज़ी से बिलों से बाहर भागना
- मछलियां: सतह पर आना या उछलना
क्या विज्ञान इसे मान्यता देता है ?
जी हां, UC Davis, University of Tokyo, और China Earthquake Administration जैसे संस्थानों ने इस पर रिसर्च की है। वैज्ञानिक अब AI और सेंसर्स से जानवरों के व्यवहार पर नज़र रखकर ‘बायो-सेंसर इकोसिस्टम’ बना रहे हैं, जो भविष्य में चेतावनी प्रणाली में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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क्या हमें जानवरों के संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए ?
बिलकुल। जब टेक्नोलॉजी फेल हो जाए, तब प्रकृति का अलार्म सिस्टम ही भरोसेमंद साबित होता है। हजारों वर्षों से जानवरों की यह संवेदना मौजूद है। जब अगली बार आपको लगे कि आसपास के जानवर असामान्य व्यवहार कर रहे हैं, तो हो सकता है वह किसी बड़ी प्राकृतिक घटना का संकेत हो।
जानवरों का आपदा पूर्वाभास केवल एक रोचक तथ्य नहीं, बल्कि संभावित जीवनरक्षक जानकारी है। विज्ञान और शास्त्र दोनों जब एक बात पर सहमत हों, तो उसे नज़रअंदाज़ करना हमारी भूल होगी।

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