ट्रंप का
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे महत्वाकांक्षी टैक्स और खर्च योजना वाला बिल, जिसे उन्होंने खुद “वन बिग, ब्यूटीफुल बिल” कहा है, अब अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में अंतिम वोटिंग के करीब पहुंच गया है। इस बिल के जरिए ट्रंप अपने संभावित दूसरे कार्यकाल के लिए आर्थिक आधार तैयार करना चाहते हैं, लेकिन इसे पास कराने में उन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा है।
क्यों बना विवाद का कारण ?
इस बिल में तीन ट्रिलियन डॉलर के अतिरिक्त राष्ट्रीय कर्ज और सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती जैसे कई विवादित प्रस्ताव शामिल हैं। यही कारण है कि न केवल डेमोक्रेट्स बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने भी इसका विरोध किया। विरोधियों का कहना है कि इससे अमेरिका के गरीब और मध्यम वर्ग पर असर पड़ेगा जबकि अमीर वर्ग को राहत मिलेगी।
भारतीयों के लिए राहत की खबर :
हालांकि, इस बिल में अमेरिका में रह रहे लगभग 45 लाख भारतीय प्रवासियों के लिए राहत की खबर है। बिल के ताजा ड्राफ्ट में अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर टैक्स को 5% से घटाकर सिर्फ 1% कर दिया गया है। इससे उन भारतीयों को राहत मिलेगी जो अमेरिका से भारत में अपने परिवार को पैसे भेजते हैं। यह टैक्स केवल उन लोगों पर लागू होगा जो अमेरिका के निवासी हैं लेकिन नागरिक नहीं हैं, जैसे ग्रीन कार्ड होल्डर, H-1B, H-2A वीजा धारक और विदेशी छात्र।
किस लेन-देन पर नहीं लगेगा टैक्स ?
  • बिल के संशोधित मसौदे में कुछ लेन-देन को टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है:
  • अमेरिकी बैंक खाते से किए गए ट्रांसफर
  • डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान
टैक्स केवल उन ट्रांजैक्शनों पर लागू होगा जो नकद, मनी ऑर्डर या कैशियर चेक के जरिए किए जाएंगे। इसका असर उन प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगा जो अभी भी पारंपरिक माध्यमों से पैसा भेजते हैं।
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कैसे हुआ बिल में बदलाव ?
यह बिल मई में हाउस से पास हुआ था, लेकिन सीनेट में सिर्फ एक वोट से पास होने के बाद कुछ संशोधनों के साथ वापस हाउस में भेजा गया। मनी ट्रांसफर टैक्स में कटौती इन्हीं बदलावों का हिस्सा थी। अब सभी की निगाहें अंतिम वोटिंग पर टिकी हैं। अगर यह बिल पास हो जाता है तो ट्रंप इसे अपने आर्थिक विज़न की बड़ी जीत के रूप में पेश करेंगे। वहीं, विरोधियों का कहना है कि इससे अमेरिका की आर्थिक असमानता और कर्ज दोनों बढ़ जाएंगे।
Editorial

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